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Showing posts from 2010

गरीबो पे जंग

ये कैसा सरकार ने कदम उठा रखा है  
जंग गरीबो पे खतरनाक चला रखा है
गरीबो को हटाना है, उन्ही के  देश से
प्याज की बढती  कीमत तो एक बहाना है
__________________
दो बूँद पानी की मिल जाए , शुक्र है
हम गरीबो को और, क्या ज्यादा  सुख है
लूटने के लिए सारा देश तो दे रखा है
अब क्या हमारी आत्मा से भी बैर निभाना है
________________
लाल बत्ती के शोर में गुम है इतने
हमारी आँखों से गिरते आँसू की आवाज ,
कहाँ  सुन पाएँगे  
आतंक से जंग तो जीत नहीं पाए
अब क्या हम गरीबो के सीने पे
बन्दूक  चलायेगे ??
_____________________

16th Asian Games 2010 : Care to knw.......

Okie , everyone is busy , from AP cabinet to Delhi Parliament. Some are trying to save their skins and others, trying to show. The great indian demo- democracy at work. I was busy too, u see, life of a software engineer is not easy!!!Tea , Coffee , Barista ...Phone calls , networking & some work .... the cup always remains full. So busy i was, that i couldn't catch all games of Asaid. For all GGB(I say google generation boys) Asiad was first held in delhi !!!! then again in 1982 ...i dont knw when it will come back to India. May be when someone from Garibi Hatao Group will wake up to remove his garibi....haha...Commonwealth hangover!!!
Back to Games...As expected China did a great opening job!!! afterall they had to outdo us!!
This Asian games was unlike CWG , In CWG known sport heros dominated the turf, Asian Games in other hand was all about black sheeps. I did manage to chk some of them!!
Blast from the past  CWG 
I expected Deepika to do well in individual archery event , s…

बचपन के सेलेट

काश अपनी ज़िन्दगी
बचपन के सेलेटो की तरह होती
बन गए इन लकीरों को
मिटाने में मुश्किल नहीं होती

एक बूंद कभी पानी तो कभी
एक अक्स ही काफी होता
हथेलियों से मिट जाते हर लफ्ज
हर कहानी के लिए जगह काफी होता

हर लफ्ज के साथ
इसके सीने में उसके रचनाकार दफ़न हो जाते
कहानी भी होती छोटी
सब राज दफ़न हो जाते ||

शुभ दीपावली ....

कामना करता हूँ की आपकी दीपावली मंगलमय हो !!!

निशब्द ...

कभी कभी  कुछ कहना कितना मुश्किल  होता है  शब्दों की गांठ बंधना  आसान कहाँ || इन शब्दों में  पिछलन गजब की है  इनके उलझनों को सुलझाना  आसान कहाँ || अच्छा है अहसास  मूक ही रहें  इन्हें शब्दों की कमीज पहनना  आसान कहाँ ||

मेरा बिहार !!! (Republished)

मेरा जन्म  बिहार के एक शांतिपूर्ण कस्बे में हुआ था , धीरे धीरे पूरा बिहार एक जंगल राज में बदल गया !! मेरी पंक्तिया उन्ही लम्हों को बयां करती हैं !!! मुझे पूरी आशा है , किसी दिन वहा उजाला तो होगा , पर तब तक मेरा इंतज़ार कायम रहेगा !!


कभी  हसती  थी  फिजाए  जिन   गलियों  में .
वहां   अब  सन्नाटो के  जाल  बिछे  हैं  .
नन्हे  पैरो   की  छाप  जहाँ   छोड़  रखी थी  मैंने 
वहां  आंशुओ  के  लम्बे  नहर  बन  चुके  हैं 
.................................
दह  गयी  है  वो  दीवारे ,जिनके  पीछे  हम  छुपा  करते  थे 
बह  गए  है  वो  दरख़्त ,जो  वहां खड़े  रहते  थे .
जहाँ   रहती  थी  अक्सर  रौशनी  की  लम्बी  परछाईया      
वहां  अब   दिए  भी  जला  नहीं  करते  हैं 
..................................
बिखरी  ज़िन्दगी  के  पल  बचते  छुपते  रहते  हैं .
दिन  रात  के  अंतर   खत्म  हो  रहे  हैं .
लाल  आँखों  से  निकली  चिनगारिया  ही  दिखती   हैं .
मोम  से  बने  दिल  भी  सख्त   हो  रहे  हैं 
....................................
किधर  जाए  क्या  पता ,राहों  के  निशा   धुल  गए  हैं .
सुनसान  अंधेरो  में  खूखार  भछक  घूमते  हैं .

Ek Purani Gazal

मैंने ये ग़ज़ल सालो पहले लिखी थी , कभी यहाँ डालने का वक़्त नहीं मिला ...

जिसे याद करके रोये
वो हसे हमे भुला के
दिल ऐसा मेरा तोडा
छोड़ा, हमे रुला के ||
अच्छा था तेरा आना
मेरी ज़िन्दगी में माना
पूछो ना मुझसे कैसे
तडपाया तेरा जाना ||
एक बार तो मिला दे
फ़रियाद कर के रोये
सोया गया ना मुझसे
सारी रात भर के रोये || जिसे याद कर के रोये .....

Love In Computer Language (Republished)

इतना   miss करते  हैं   तुमको 
की  monitor पे  हर   वक़्त  तेरा  चेहरा  दिखता   रहता  है 
मुझे  छोड़  दो  ,ये  keyboard भी 
तेरा  ही  नाम  लिखता  रहता  है ..
.....
तेरे  यादो  की  script दिल  पे  बार  बार 
Timly execute होती  रहती  है 
हम  बार  बार  memory free करते  है  फिर  भी 
ये  CPU दिल  की , तुम्हे  सोचने  में  ही  busy   रहती  है ..
....
कितने  Variables बदल  डाले  हैं   इस  दिल  के 
पर  core algo पर  तेरा  ही   logic छाया  रहता  है ..
बार  बार  Itration छोड़  कर  line debugging करते  हैं 
पर  ये  मन  तेरे  ही  लूप  पे  अटका  रहता  है ...

CWG Updates from a Dummy guy

I have never been a multi sport lover as such. From the day I was born, everyone played cricket , cricket & cricket , sometime i use to think that Gulli Danda was one variant of cricket. I too was a decent cricketer until my dad thought thatplaying was waste of everyone’s time and I was turned into a software engineer. Apart from playing  cricket , I had my chances to play or watch other sports like football , TT, a bit of tennis , badminton and basketball. I must say I have enjoyed them all. But …Hey, this article is not about me its abt CWG. If u don’t know what it means , it is termed as Commonwealth Games….before some media goons turned it as Con Man Games. I must say I enjoyed all the mud thrown on Mr Cool Madi, I wish throwing mud was also one of the discipline in CWG , we must have got a gold medal. Personally I though the media really sometime made “teel ka pahad”. Being so called a third world country , this is the best arrangements we can expect. Now back to games….since…

आज का महाभारत

तन्हा  बिखर  सा  गया  है  कुछ  शब्द   कहानियो  से  उतर  सा  गया  है  दूर  चला  है  जो  रौशन   ज़हां   को  छोड़   के  ये  मन  कुछ  उजाड़  सा  गया  है ||
ये  जो  कुरुछेत्र  सा  हर  जगह  छाया  है|  हर  कोई  ने  खुद  को  पांडव  और  दुसरे  को  कौरव  बताया  है||  लुट  रही  है  द्रौपदी की  तरह  सच  की  इज्जत | ये  दुशाशन  क्यों  सबके  मन  पे  चढ़  आया  है|| 
क्यों  सब  राम  नंगे   पैरो  , बेबस  जंगलो  में  घूम  रहें  हैं | पवनपुत्र   का  भेष   बदल  के  हर  रावण  उनका  रक्त  चूस  रहें  हैं ||
कलयुग  में  रचे  गए  ग्रंथो  में | कौरव  का  ही  बोलबाला  है||  हर  रचे  गए  महाभारत  में  यहाँ अब|   अधर्म  ही  जीतने  वाला  है ||

Some Wish Cards I Made Using MS-Paint

Assorted Love Words!!!

एक तस्वीर तुम्हारी
आँखों में लगा रखी है मैंने
तेरे चेहरे को ही
अपनी दुनिया बना रखी है मैंने ||
_____________________
तेरे चेहरे को ही अपनी
दुनिया बना रखी है मैंने
कभी आओ तो जानोगी
की ये दुनिया कैसे सजा रखी है मैंने
_____________________

कभी आओ तो जानोगी  की ये दुनिया कैसे सजा रखी है मैंने  एक तिनका सा मोहब्बत का , सहारा ले के
अपनी सासों को बचा रखी है मैंने
_____________________
एक तिनका सा मोहब्बत का , सहारा ले के
अपनी सासों को बचा रखी है मैंने  देख पाएंगे तुम्हे एक बार ही सही  चन सासों को छुपा रखी है मैंने  ______________________

इन शहरो में

कुछ सीलन सी है
मेरे घर के दीवारों में
बारिस की कुछ बुँदे
मेरे घर रहने आ गयी है
________________
लगता है इनका मन
ज़मी पे लगता नहीं
की हरयाली शायद
ज़मी को छोड़ के
आजकल इमारतो के
छज्जो में समां गयी है
___________________
ठंडी हवाए बहती नहीं रास्तो पे
पंख खोलने  को जगह नहीं है
मकानों के अन्दर ही बसेरा है इनका
बंद रहना आजकल सजा नहीं है
_________________________

All is Well!!!

सब देखते हैं अंधेरे को
इस अंधेरो में रौशनी कोई क्यों देखता नहीं
हथियार खून रक्त की चर्चा हर जगह है
पाल रहें पेड़ो की माली को कोई पूछता नहीं ||
भ्रष्ट नेताओ की बात सब कोई करते हैं
रोज लड़ रहें समाजवादियो को कोई सोचता नहीं
मिल रही है हर बेकारो को जगह हर अखबारों में
अन्ना हजारे , उनिकृष्णन को कोई पूछता नहीं ||
आज भी इमानदारी कायम है
नहीं बिश्वास तो इन पक्तियों को पढने वाले दिल से पूछ लो
जो ना होती सच्चाई आज भी दिल में
तो कब के अँधेरे खा जाते हर सुबह को ||

Just Doing Nothing...

It was such a boring day...Didnt do anything!!! just played with Ms Paint...

बातें कम हैं

लफ्ज कहाँ  मिलते हैं
हमें कोई बता दे ज़रा
हमे भी दो चार आने के
बातें खरीदनी है ||
की अक्सर प्यार बताना
मुस्किल पड़ता है मुझको
कभी राते तो कभी बातें
कम पड़  जाती हैं ||
ये मन सोचता है कुछ कहने को
पर पेट के अंदर तितलिया उडती हैं
होटो से आती नहीं बाते बाहर
दिल की बाते दिल में ही रहती हैं||
आती है वो , आकर चली जाती हैं  
हम लफ्जो को गिनते रह जाते हैं
जान  नहीं पते खुद के मन को 
उनके चहरे को पदते रह जाते हैं |

Ye kaIsi pYas hAi

(Refers to yEt aGain , oNe mOre tRain acciDent on  19th  जुलाई 2010)

फिर से हुआ है खून
शांत से बैठे
मूक बधिर हम जैसे परिंदों का
आज फिर लहूलुहान ट्रेनों ने
रक्त स्नान किया है

ये कैसी प्यास है
बेजान ट्रेनों का
जिसने हर दुसरे दिन
बेबस हम जैसे परिंदों का
रक्त पान किया हैं
....
क्यों बुझती नहीं प्यास इसकी
क्यों , कोई इसकी तृष्णा मिटाता नहीं
फिर ना धोये खून से ये हाथ अपने
कोई क्यों ऐसा , दिन आता  नहीं

Story of an IT Professional!!!

मैं देखती हूँ  दुनिया को  अपने कंप्यूटर के अंदर के windows से | की अपने इस इमारत में  बाहर देखने के लिए खिड़किया नहीं || मिलती हूँ अपने परिवार और दोस्तों से  फेसबुक , ऑरकुट और लिंक्ड इन पे | की मेरी ब्यस्त ज़िन्दगी में  घर जाने आने का वक़्त नहीं || बनती रहती  हूँ  लॉजिक सारी दुनिया के लिए  अपनी ज़िन्दगी कभी ऑन टाइम चलती नहीं | पंक्चुअल हूँ अपने हर क्लाएंट मीटिंग में  पर समय पर घर कभी, पहुचती नहीं || बखूवी manage करती  हूँ  बड़ी टीम को  पर घर का मैनेजमेंट बिगड़ सा गया हैं|  Project तो टाइम में चल रहा है  पर घर का मौसम उजड़ सा गया है || सात समुंदर दूर , हर कोई जानता है मुझे  पर घर का पडोसी पहचानता नहीं | प्रोजेक्ट पे सब अंडर कण्ट्रोल है  घर पे टिंकू कोई बात मानता नहीं ||   पिछले दिनों घर के लैपटॉप पे  ड्राफ्ट इ मेल मिला था  टिंकू ने God@जीमेल.कॉम पे एक ख़त लिखा था  कहता हैं , मम्मी रोज घर क्यों नहीं आती  | सोनू के मम्मी की तरह , कहानिया क्यों नहीं सुनाती||   पढते पढते मै आसुओ को रोक ना सकी  
जब कर ना सकी गिल्ट पे काबू  तो देने God को clarification ,  दो कदम आगे बढ़ी|    पर इन इमारतों से बाहर झाकने के लिए  फिर से, क…

एक और सिपाही

ये जो दिन के अँधेरे हैं  कुछ काले मटमैले से सवेरे हैं  उन काली स्लेटो में  उजली लकीरे खीचना चाहता हूँ  मैं इस देश का एक और सिपाही हूँ  कुछ सूखे से कमजोर खड़े से पेड़ो को  अपने रक्त से सीचना चाहता हूँ || बेतहास भागती टेढ़ी मेढ़ी सी  बेअंजाम गलियों को काट कर  कुछ पक्के नए से, सीधे रौशनी से भरे  राहों को पाटना ही मेरा संकल्प हैं  छोड़ दिया हैं मैंने अपने अपनों को  अब इस देश के  सिवा, नहीं मेरा कोई बिकल्प है|| Picture used from http://noelrt.com/wp-content/uploads/2009/01/soldier-silhouette.gif

अपना देश

ये ज़मी ये आसमा 
छोड़ कर इसे कहाँ जाऊ
बसी है इस मिट्टी की खुशबू
मेरी सासों में
इस खुशबू को खुद से
कहाँ छुपाऊ ||
मेरा देश तो मेरा है
इसे छोड़ के
घर कहाँ बसाऊ
मकान तो कहीं भी बना लूँगा
पर समां सकूँ अपने देश को इसके अन्दर
इतनी जगह मै कैसे लाऊ||
मुझे बताओ
की एक मकान को
अपना मुकाम मै  कैसे बनाऊ
मेरा दिल तो हिंदी है
इसे कोई और भाषा कैसे समझाऊ
कुछ बाते तो मुझे हिंदी में ही अच्छी लगती है
भला हर बातो का अंग्रेजी अनुबाद कैसे बनाऊ ||

एक भारतीय की कहानी ...

मै भारत का साधारण नागरिक हूँ
पूरा भारत मेरा परिवार है
कुछ एक फसादों को छोड़  दो
तो मुझे हर भारतवासी से प्यार है ||
पर,
मेरे कुछ भाई ट्रेन धमाके में मरे गए
कुछ बंधू गोकुल चाट खाते खाते
अल्ला को प्यारे हो गए
कुछ औरो को आतंकियों ने भुन डाला
चहकती महकती मुंबई की गलियों को
इन दरिंदो ने सुना कर डाला ||
फिर,
कुछ भाई बहनों को
निठारी के दैत्यों ने चबा डाला
जो बचे उन्हें समाज के ठीकेदारो ने
डायन कह के , जिंदा ज़ला डाला ||
भारत मेरी माँ हैं
सोचा था भारत में माँ को तो सम्मान देंगे
कहाँ  पता था चन रद्दी नोटों के लिए
कुछ मेरे ही भाई , अपनी माँ को बेच देंगे ||
अब
मेरा परिवार तर बतर हो गया हैं
कोई फॉरवर्ड कोई बैकवर्ड तो कोई SC/ST हो गया है
प्यार के रिस्तो का टेस्ट कोई खेलता नहीं
सबकी पसंद 20/20 हो गया है ||
हमारे रखवाले ही आज कल
हमारे हत्यारों से हाथ मिला रहें हैं
इसलिए तो सत्ता में बैठे मेरे बंधू जन
हमे छोड़ , भगोड़े anderson को अपना यार बता रहें हैं ||
(Anderson is prime accused in Bhopal gal tragedy that took more than 15000 indian lives , he was escorted freely from India to US by our own …

ये कैसा समाज !!!

जब जब कमजोरो और कुचलो पे (Ref to recent train killing)
जुल्म कही हो जाता है
कम्बल ओढ़ के ये समाज
दूर कही सो जाता है ||
वही बेबस कुचलो से कोई
जब आगे बढने आता हैं
दैत्य बन के फिर वही समाज
सामने खड़ा हो जाता है ||
कुछ पता नहीं क्यों मुझको
कुछ खास समझ नहीं आता हैं
मर जाते हैं हजारो बेमतलब ही (ref to bhopal gas killing)
तब क्या समाज तेल लेने जाता है ||
जब आती हैं न्याय करने की बारी
कोई खड़ा नहीं हो पाता है
बाहुवली और बलशाली के पीछे
खुद को खड़ा वो पाता हैं || (Congress full supporting its act to send anderson back)
लुटती है इज्जत जब चलती ट्रेनों में
कोई कहाँ  बचाने आता हैं
ये धरम करम का  रखवाला
क्या गा&**&%  मा%^^& जाता हैं(this is wht i want to write but....)
क्यों कायर इतना बन जाता है ||

कवि के रूप

कभी लगता है की वो एक शब्दकार है शब्दों को तराशना उसकी फितरत है भावनाओ से खेलना उसकी आदत वो शब्दों का आकार है हा , शायद वो शब्दकार है || कभी लगता है की वो एक चित्रकार है लेखनी उसकी तुलिका है और भावनाए उसके रंग शब्दों से चित्र बनाता हैं वो चित्रों का संसार है हा , शायद वो चित्रकार है || कभी लगता है की वो एक कलाकार है कहानिया उसके मंच हैं और लफ्ज़ उसके नायक कविताओं से अभिनय करवाता है वो रंगमंच का सूत्रधार है हा , शायद वो कलाकार है ||
picture used from http://fineartamerica.com/images-medium/portrait-of-the-crazy-poet-kelly-jade-thomas.jpg

सपने काम आयेंगे ...

Rediff link: http://business.rediff.com/slide-show/2010/jun/10/slide-show-1-fridge-that-runs-without-electricity.htm

सपनो से कभी दूर ना करना खुद को एक दिन सपने ही साथ देंगे तेरा कुछ कर दिखाने   की तमन्ना रंग लाएगी एक दिन एक साधारण व्यक्ति की आसाधारण कहानी , पूरी कहानी के लिए रीडिफ़ लिंक पे क्लिक कीजिये.     

beating the odds

य़की  हैं  जो  तुम्हे  खुद  पर ये  आसमा एक  दिन  जरुर  झुक  जायेगा किस्मत  पैसो  की  गुलाम  नहीं  होती मेहनतकश  है  तू  अगर , बस  खोल  दे  किवाड़ , एक  दिन  मिलने  किस्मत
तेरे  दरवाजे  पे   चल  के  आएगी  .. News extract from Rediff (07 June 2010)

तूफ़ान आते हैं

अँधेरी रातो में
तूफ़ान आते हैं
पता किसी को भी नहीं चलता
बरबादी फिर भी मचाते हैं ||
कही  दिल कुचले जाते हैं
कई  सपने दफ़न हो जाते हैं
आँखों को भी नहीं चलता
बरबादी फिर भी मचाते  हैं
अंधेरी रातो में
तूफ़ान आते हैं ||
हवाए तेज होती हैं बहुत
अरमानो के काटो में फसती  नहीं
दिल को चिर के निकल जाती हैं
पता दिल को भी नहीं चलता बरबादी फिर भी मचाते हैं
अंधेरी रातो में तूफ़ान आते हैं || दिखता सब है अंधेरो को अंगूठा दिखाती है सवेरो को जो ना देख पता हैं मन के वाबंदर को उबल रहें घनघोर समुन्दर को जो इंसान बनाते हैं
इसलिए
अँधेरी रातो में तूफ़ान आते हैं
पता किसी को भी नहीं चलता
बरबादी फिर भी मचाते हैं ||
picture used from http://mdb2.ibibo.com

Mai bhi US Jaau

एक बार मेरे मन में आया
मैं भी US  जाऊं
क्या रखा हैं रूपये में
मै भी dollar में कमाऊ ||
अपनों को कर के टाटा
हमने भी बिस्तर बांध लिया
बढाना हैं अपना भी बैंक बैलेंस
हमने भी मन में ठान लिया ||
कहा थैंक  यू GOD को 
जो वीसा में पास हो गए 
क्या कहू plane में  बैठे बैठे 
हम भी cattle class हो गए     ||
चलो जैसे भी सही
हम US पहुच  गए
थोडा गम तो हुआ की
सब अपने पीछे रह गए ||
देख कर US हमे तो
बड़ा मजा आया
चैन मिला दिल को की
सर खाने कोई ऑटो वाला नहीं आया ||
कुछ हफ्ते तो दिन मेरे
बड़े चैन से बीते
गुजर गए यु ही पल
starbucks की coffee पीते पीते ||
जब आई घर की याद तो
Skype लगा लिया
हमने भी internet पे
अपना अड्डा बना लिया ||
अजब थी दुनिया यहाँ की
हम लेफ्ट तो ये राईट चलाते  थे
आधे से ज्यादा ज़िन्दगी
अपनी कारो में बिताते थे ||
शोर शराबो की आदत जो थी इतनी
की ये सन्नाटे मुझे फिर सताने लगे
जेब में भरे dollar थे फिर भी
रूपये मुझे याद आने लगे ||
आने से पहले मुझे बीवी की
लम्बी लिस्ट याद आ गयी
डाल लिया हर Item
जो भी बस्ते में समां गयी ||
जा कर White House हमने
कुछ और फोटो खिच्बायी
इससे पहले NRI बन जाऊ
India की…

खोये रहते हैं (Gazal)

तेरी  आँखों  में  खोये  रहते  हैं


तेरी  आँखों  में  खोये  रहते  हैं


दिन  भर   सोये  सोये  से  रहते  हैं


तेरी  आँखों  में  खोये  रहते  हैं
...


तेरी  जुल्फों  को  हटाने  की  कशिश


तेरी  जुल्फों  को  हटाने  की  कशिश


हम  तो  तेरे  पास  खड़े  रहते  हैं


हम  तो  तेरे  पास  खड़े   रहते  हैं


तेरे  आँखों  में  खोये  रहते  हैं ...१
....


कितनी  गहरी  सी  हैं  आँखे  , उसपे  हिरनी  सी  चमक


कितनी   प्यारी  हैं  ये  बातें , उसपे  सोंधी   सी   महक


हम  तो  पल  भर  भी  नहीं  हटते   हैं


तेरे  आँखों  में  डूबे  रहते  हैं ...१

(Picture used from www.flickr.com)

मनवा करे है धक् धक्

(नीचे लिखे पोएम को गाने की तरह पढ़िए , ये एक इंतज़ार करती गाव की औरत की बारे में है )
खाली मनवा करे है धक् धक्
कोसे  है दिल को , करे हैं बक बक ....खाली मनवा ||
गए हैं दूर , पिया हमसे , 
भाए ना कुछ कुछ , पिया तबसे 
जुगुनुवा से करे हैं बातें 
आधी रतिया काटे हैं तन को ....खाली मनवा  ||
नदिया छोर ,  का करे है कस्ती ?
एक पग ना चले है, कस्ती
करे हैं डगमग , पउवा ना सम्हले
कैसे भर लाऊ कुए से पानी .... खाली मनवा ||
भरा हैं आंखन , करे हाउ डब डब
पढ़ा ना जाए , मनवा भर आये
कैसे खोलू चिठिया तोरा
हथिया मोरा पत्थर हो जाये ....खाली मनवा||

अर्थ प्यार का

तेरे तन्हइयो के गम में
हम बार बार मरते रहे
हर सास बोझ लगती थी हमे
इसलिए दिल के बोझ , बढते रहें||
...
उठाया नहीं गया एक दिन
ये बोझ मुझपे भारी से  हो गए
ज़ला डाला दिल को, टुकडो में काट कर
आंशुओ के सैलाब में , ये कतरा कतरा बह गए ||
......
दिल जो ना रहा, मन ,खाली सा हो गया
चिराग बुझ गए तो , मैं सवाली सा हो गया
कम से कम जुड़े थे, तेरे तन्हइयो की यादो से
अब  तो बेदिल मैं , भिखारी सा हो गया ||
....
भटका कहाँ  कहाँ  , मैं खुशियों की दौड़ में
गया जहाँ  भी, दिलजले मिले
खुदा से मांगी मोहलत , मोहब्बत के नाम पे
की आधी ज़िन्दगी तो मैंने , कतरों में काट दी ||
......
दिखा आइना मुझे , उपरवाला भी हस पड़ा
दी तुम्हे चाहत का तोफा , तुमने क्या समझ लिया
रख लेते उसे एक कोने में , कहाँ पूरा दिल चाहिए था
ऐसी अनमोल यादो के , तुमने कतरों में बदल दिया||
.....
आपने नादानी पे , हम खुद ही  हस पड़े
एक हीरा था मेरे पास , ना समझ सके
कद्रदान था खुदा , मुझपे फिर इंनायत हुई
इसबार हम प्यार को , कतरा ना होने देंगे
तन्हाई , दूरिया , दर्द या खुशी मिले जो भी
हम फिर से इन्हें, खुदा कसम , बोझ ना कहेंगे |

I am angry:-|

( I am deeply hurt by death of 70 + people on suspected Maoists blast!!i am angry on killers..but i am more angry on people who have failed us.)
वो  बंद  कमरों  में , चरखा  चला  रहें  हैं ..


कोई  देखो , बाहर  खुनी , कत्लेआम  मचा  रहें  हैं ...

.......

गुम  हैं ठंडी  हवाओ  के  शोर  में  इतना  ..

मजबूर  जनता  का  शोर , नहीं  सुन  पा  रहें  हैं ...

नंगा  कर  दिया  हैं  इन  पापियों  ने , मजबूर  लोगो  को

वो  साहब  बंद  कमरों  में  चरखा  चला  रहें  हैं ...
......
वो  खून  की  होली  हर  रोज  खेलते  जा  रहें  हैं

कभी  स्टेशनों  , कभी  पटरियों  पे  , लहू  नज़र  आ  रहें  हैं ,

ये  व्यस्त  हैं  चूजों  की  गिनतियो  में ,

घर  बैठे  गाँधी  टोपी  बना  रहें  हैं
....

हक़  नहीं  हैं  इन  लोगो  को  एक  दिन  और  जीने  का

आँखे  खोल  जो  जानता  को  मरते  देख  रहें  हैं

कैसे  दरिन्दे  हैं  उजली  टोपी  पहने 

भूकी  जानता  को  आन्गिठेयो   में   सेक  रहें   हैं

भाग्य !!

ए  चित्रगुप्त 
सुना है एक लेखनी है आपके पास
जो रखती है हर किसी का हिसाब ||
मेरे कहानियों में कुछ पन्ने , मटमऐले से है
गर्द और दागदार कुछ छन , अकेले से हैं ||
दे सकेगो वे लेखनी , मुझे एक दिन के लिए
मुझे कुछ किस्सों के किरदार मिटाने हैं
ज़िन्दगी के गहरइयो में जा कर
कई दिलो  के हिसाब चुकाने हैं ||
महान इंद्र
सुना है बूंदों का सागर है आपके हाथो में
हर तपती ज़मी की , प्यास बुझाते हो
बंजर , पर्वत , नदी , झरने
सबको बस आप ही बनाते हो ||
क्या दे सकोगो कुछ बूंदों मेरे भी हाथो  में.....
मेरे बागो में में भी, सूखे कुछ दरख़्त हैं
बहूत कमजोर से खड़े हैं एकटक आँखे ले के
बाहर से दिखते , बहुत ही शख्त हैं ||
कुछ बुँदे शायद बदल दे मेरे बागो को
शायद नए  पत्ते निकल आये , बूंदों को देखकर
पतझड़ जाए ना जाए मेरे बागो से गम नहीं
शायद खुशिया आ जाए , पल भर का सावन सोच कर ||

पैसा पैसा

कभी बना था पैसा लोगो के लिए
आज पैसे  के लिए लोग बनते हैं
सुबह शाम भाग रही है दुनिया
हर चेहरा पैसे के ले बदलते हैं
..........
कितना अजीब हैं पैसा
हर पल बसेरा बदल लेता हैं
प्यार इतना फिर भी है, पैसे से
हर कोई खुद को, बदल देता हैं
.....
जानते नहीं हैं ज़िन्दगी की कीमत
हर कीमत वस, पैसा ही बनाती हैं
अपने पराये, अब खून से नहीं
पैसे के वजन से आकी जाती हैं
....
इस अंधेर ज़माने में
पैसा ही चमकता सितारा है
मंजिले मिलेंगी उन्हें , जिन्हें हासिल हैं पैसा
वाकिओ के लिए , भगवान् ही सहारा हैं
..
Picture taken from www.flickr.com

मै तो मैं हूँ

मैं कौन हूँ
कोई बता दे मुझे
क्या करे की मिले खुशी
कोई समझा दे मुझे  |
देखा  जिस किसी को
सब सवाल ही लगे
परमात्मा , आत्मा
सब ख्याल ही लगे ||
आँखे मूंद चलू
या , खुद के रस्ते बनाऊ
या, फिर दुसरो के लिए
खुद ही, एक रास्ता बन जाऊ |
ज़न्दगी कितनी सकरी सी है
दो हाथ कुछ खास खुले  नहीं
आस पास की दीवारों ने , ज़कड़ दिया
पंख खोल , कभी आसमानों में उड़े नहीं ||
ज़ब खोले नहीं सब राज़ पहेलियो के
तो सब प्रशनो की गुथी कहा से लाऊ
कुंजी तो बाट, मैं भी सकता हूँ
पर खुल जाए, वो ताले कैसे बनाऊ |
बहूत पढ़ा हैं पन्नो में , किस्से ज़िन्दगी के
उन्हें काट के अपनी कस्ती कैसे बनाऊ
बहूत करीब हु मैं अपनी कहानी से
मैं तो मैं ही हु ,
भला मैं, उन पन्नो सा कैसे बन जाऊ ||
(Picture used from http://www.rogermurrell.com)

बिछोह

अहू अहू करे , दिलवा हमार
कहे नहीं कुछ भी , कभी
कभू करे बतिया हज़ार
अहू अहू करे
दिलवा हमार
...
टुक टुक देखे , कभी
खोले किबाड़ 
कैसन कैसन बतिया , आये मन में
डर लगे है , सरकार
कैसे खोले हम किबाड़
अहू अहू करे ...दिलवा हमार
....
जला हाउ दिलवा ऐसे
चूल्हा में कोयला जैसे
हो ना जाये राख , दिलवा हमार
.....
किते दिन बीते है रोज
बीते नहीं विरहा  के शोर
खट्टे से  लगे है पल
डंक कटे  हैं जोर, बिछुवा हज़ार
अहू अहू सा करे हैं , दिलवा हमार
....

रक्त

कुछ लाल सा हैं कब से, उबल रहा मचल रहा ...... तोड़ने को हर हदे दिल की हर सरहदे चल रहा कुछ लाल सा हैं ...उबल रहा .... कोई साथ दे अगर एक हाथ दे अगर कोई तो दिशा दिखा कोई रास्ता बता कुछ लाल सा ....उबल रहा ... .... ठाहरा नहीं , कही जब से मिली  ज़मी बहता ही रहा कितने दिए सितम लेकिन हर जनम सहता ही रहा कुछ लाल सा  है.....उबल रहा .. कोई आग तो जलाये कुछ लकडिया तो लाये चुपचाप कब से बैठा कही ठंडा हो ना जाए कुछ लाल सा है ये ...कब से उबल रहा ...... पंदंदिया बना के नलयो में बांध डाला कुछ कर ना जाए ये कबसे मचल रहा कुछ लाल सा है ...कब से मचल रहा ....