Wednesday, July 19, 2017

बन जाना कभी

कभी मैं जो रास्ता बनु
तुम मेरी मंजिल, बन जाना कभी
मैं तुममे और तुम मुझमे
इस तरह सिमट जाना कभी ||

की जब बनु मैं सोच
तुम अहसास बन जाना कभी
वयां जो कर ना पाऊ खुद को कभी
मेरे लफ़्ज़ की आवाज बन जाना कभी ||

ख़तम हो जाए उड़ान जब मेरी
मेरे थकान  की  आराम बन जाना कभी
हो जाये ख़तम एक दूसरे में
कभी तुम मुकाम, बन जाना मेरी ||


Random thoughts ...

Random thoughts ... क्यू गुमसुम सी रहती हो , हवाओं की तरह , लहराओ न कभी । उङ जाती हो पलक क्षपकते ही , साथ आओ न कभी ।। कुछ लम्हों की...