Thursday, March 27, 2014

राहे लम्बी थी


कुछ बातें


लगता हैं  ,  राहे लम्बी थी

और सफ़र छोटा
कट गया इस तरह
जैसे थी वो काग़ज की नॉव
कितना भी बचा ले खुद को
उफ़नती नदी से कहाँ बच पाती
समां गयी सागर की बाहो में ॥

कुछ तराने  

दास्ताँ छोटी ही रहे तो, अच्छा हैं 
कि बूंद बूंद लम्हा, तूफ़ान बना देता हैं 
मोम जैसा ये मन कहाँ झेल पायेगा 
जो लोहे जैसो को, पिघला देता हैं 

कुछ बातें

ये जो छोटी छोटी दास्ताँ बन जाती हैं
विशाल से फैले  मन मरू में
ठिकाना मिल तो जाता हैं , मुसाफ़िर को
पर छोड़ के आगे जाने का वक़्त जब
करीब आता हैं तो , मानता नहीं ये मन


कुछ तराने  
मुश्किल हैं समझाना मन को 
मन को दुहराना पड़ता हैं ॥ 
अक्सर उलझ जाता हैं वक़्त 
कि वक़्त को सुलझाना पड़ता हैं 

कुछ बातें


मेरे घर के बगीचे में

बेमौसम फूल निकल आया हैं  , रंगो से भरा
एक रेतीली से झड़ी से ,
पास खड़े पौधों को चिढ़ाता रहता हैं , हरदम
सोचता हूँ , कब तक इतराएगा
नादान हैं जानता नहीं कि जैसे ही फूल सूखेगा
बागवान मिटा देगा उसे ,
कि पास खड़े पौधों को , थोड़ी और जगह मिल जाएँ


कुछ तराने  
गुज़र जाना ही वक़्त के लिए अच्छा हैं 
कि ठहरा हुआ लम्हा, सड़ने लगता हैं 
कटे हुए  शाख़ को  , सजने दो किसी मैखाने में 
बाहर पड़ा,  नज़रो  कि मार से 
बेचारा , अकड़ने लगता हैं ॥ 
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Saturday, March 15, 2014

Holi Holi !!!



मुस्कुरा ए मन 
कि होली हैं 
भर जाएगा हर आँगन 
कि होली हैं 

Happy Holi to all my friends

एक नज़र इधर भी

कभी देख लो एक नज़र इधर भी की रौशनी का इंतज़ार इधर भी हैं मुस्कुरा के कह दो  बातें चार की कोई बेक़रार इधर भी हैं || समय  बदलता रहता हैं हर...