Sunday, May 22, 2011

गैर

उन्हें  जन्नत   दी  है  तोफे  में

हमे  तो  दोजख   में  भी  ठिकाना  ना   मिला

हर  दुआ  और  दवा  उनको  मिली

हमे  तो  दर्द  बताने  का  भी , बहाना ना   मिला ||



की  परदे  में  हम  हैं

या  उन्होंने  चेहरा  छुपा  लिया 

नज़रो  से  मिलती  नज़र  नहीं  आज  कल , तो  

हमे  भुलाने  का  बहाना  बना  लिया  ||



बिछी  हर बिसात उनके  लिए

हमे  तो  जंगे   जहद  से  ही  निकाल  डाला

हर  फतह  में  नामो  –शोहरत   मिली  उनको

हमरे  खून  को  तो उन्होंने , पानी  बना  डाला  ||



इस  अंधेर  नगरी  में  

अंधो  का  बोलबाला  है

शोर  माचाने  बाले  जिंदा  रहते  है  यहाँ

आँख  वालो  का  मुह  काला  है  ||

Random thoughts ...

Random thoughts ... क्यू गुमसुम सी रहती हो , हवाओं की तरह , लहराओ न कभी । उङ जाती हो पलक क्षपकते ही , साथ आओ न कभी ।। कुछ लम्हों की...