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Showing posts from September, 2011

शुक्रिया हिंदी ||

नहीं कह पाता गैरो की जुबा में

अपनी कहानी |

मेरे आँखों को अच्छी लगती है

सिर्फ अपनी भाषा में लिखी

अपनी जुबानी ||
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प्यार के संवाद तो, दिल से निकलते हैं

उनका अंगेरजी अनुवाद कैसे बनाऊ

मेरा दिल तो हिंदी है

उसपर अंगेरजी की परत कैसे लगाऊ ||
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दिल की परतो को

जब भी शब्दकार की छुरी से कटा

वो निकली आह , हिंदी ही थी |

लगाया था मरहम जिसने

खुद को खर्च करके

वो हमदर्द, वो दिन भी

हिंदी ही थी ||
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न जाने कितनो ने दफनाना चाहा

समय की मिटटी में तुम्हे , मुर्दा कह के |

तुम फिर भी रही जिंदा

दिलो में हमारे , हमारी जुवा बन के ||
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आज हिंदी दिवस पे

हर कबि का, तुम्हारे लिए पैगाम है |

तुम्हारे संघर्ष को

हम सभी का , सलाम है ||
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बेबस नहीं रहना है ||

क्या आँशु बहाने के सिवा कुछ और करना, नहीं है सिर्फ धमाको से ही मरना सही है ||
जब तक डरते रहोगे, डर से ये खोखले टोपीवाज  डराते रहेंगे | आतंक के खिलाफ जंग जारी है कह कह  के हर लाश पे वो, मुस्कुराते रहेंगे ||
मन में दबाये बैठे हम इस गुस्से से क्या कर पाएंगे | फटेगा तो अन्दर ही फटेगा उस नहीं तो, इस धमाके से बेमौत मारे ही जायेंगे ||

डरते नहीं हैं ये टोपीवाज़, आतंक से अपना कोई आज तक, मरा ही नहीं कभी उठाई नहीं लाशे, अपने बच्चो की इसलिए शायद , आँखों का तालाब कभी भरा ही नहीं ||
कोई नहीं जलाएगा मशाल अपने लिए हमारे मन का अँधेरा है खुद ही जलाना होगा | छोड़ दे विश्वास  , इन टोपिवाजो से  शायद , अब आतंक से लड़ने हमे , खुद ही को आगे आना होगा ||

जय हिंद !!