एक रात रूमानी हो जाये
हर बात सुहानी हो जाये
मिला दो शाम को एक शायर से
की ये शाम दीवानी हो जाए
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रोको ना हाथ प्यालो के
की ये रात बेमानी हो जाये
चढ़ने दो नशा इरादों पे
एक और कहानी हो जाए
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हम होश गबाये बैठे हैं
ना होश मुझे अब आने दो
बेचैन हो रही धड़कन है
होटो को और पिलाने दो
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मिल जाए दिल से दिल ए साकी
तो ये रुत रूहानी हो जाए
वक़्त नहीं है हुजुर किताबो का
अब कुछ बात जुबानी हो जाये
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