Thursday, March 23, 2006

Hoo Jaaye

एक  रात  रूमानी  हो  जाये
हर  बात  सुहानी  हो  जाये
मिला  दो  शाम  को  एक  शायर  से
की  ये  शाम  दीवानी  हो  जाए
....
रोको  ना  हाथ  प्यालो   के
की  ये  रात  बेमानी  हो  जाये
चढ़ने   दो  नशा  इरादों  पे
एक  और  कहानी  हो  जाए
....
हम  होश  गबाये  बैठे   हैं  
ना  होश  मुझे   अब   आने  दो
बेचैन  हो  रही  धड़कन  है
होटो  को  और  पिलाने  दो
 ....
मिल  जाए  दिल  से  दिल  ए  साकी
तो  ये  रुत  रूहानी  हो  जाए
वक़्त  नहीं  है  हुजुर  किताबो  का
अब   कुछ  बात  जुबानी  हो  जाये
 ...

एक नज़र इधर भी

कभी देख लो एक नज़र इधर भी की रौशनी का इंतज़ार इधर भी हैं मुस्कुरा के कह दो  बातें चार की कोई बेक़रार इधर भी हैं || समय  बदलता रहता हैं हर...