Skip to main content

Posts

Showing posts from 2011

कौन हो तुम||

ये गाँधी की टोपी
तो मेरे बाप की जागीर है |

कौन हो तुम , जो इसे पहन कर
मेरे दरवाजे पे चिल्ला रहे हो
क्या सोच कर
मेरे  साम्राज्य की नीब
हिला रहे हो  ||

न्याय , अन्याय की परख
तुम्हारे बस की बात कहाँ
कटघरा ही बस जगह है तुम्हारी
हमारी शान में गुस्ताखी करो
ऐसी तुम्हारी औकात कहा ||

आम आदमी हो , आम ही रहना सीखो
वरना गुठलियों की तरह चूस लियो जाओगे
बंद कर देंगे हुक्का पानी तो
हर बूंद के लिए तरस जाओगे ||

नादान, ये प्यार

कुछ खामोशियो से उलझी
लताएँ ||
दिल के दरारों से
उग आई हैं ये ||
आँखों के पानी से सीचा है
खुद को  ||
तभी तो वक़्त को जीत पायी हैं
ये ||

नादान है ये प्यार ,
बूंदों की तरह , ज़मी को छूना चाहता है ||
कुछ सहारा मिल जाए , दो टुकड़ा ही सही
अपने पैरो पे खड़ा होना चाहता है ||

भूल  जाता है , की
बेबस लताओं की, कोई ऊचाई नहीं होती |
जो पनपते हैं , दिल के गहरायियो में
उनकी कोई परछाई नहीं होती ||

मानता नहीं है
उम्मीदों के पंख लगा के
उड़ जाना चाहता है |
इसे तलाश है अपने गगन की
हर रिश्ता तोड़ कर
उसी रस्ते पे
मुड जाना चाहता है ||

बहने दो

जालों में, जो बंद है ,
ज़िन्दगी सी
खोलो , बहने दो उसे
एक नदी सी | 
उड़ने दो ......., रोको न कही ,
आने दो
एक खुशी सी ||
अला , ला ला ला ला , लाला .....

____

न बनी है ये
छिपने के लिए
सुनो , न बनी है ये
चुप रहने के लिए |
आने दो................ , दिल की आवाजे
कहने दो ..........., कहना चाहता है कुछ बातें
खोल दो , दिल को अब 
दिल बना है ,  रहने के लिए ||
अला , ला ला ला ला , लाला .....

_____________

कही , न देर हो जाए
ये जो शमा है , बुझने  ना पाए 
उठो ................ जागो
अपने हाथो में, है चाँद सूरज
कुछ कर दिखाओ , सुबह बनाओ
अला , ला ला ला ला  , लाला .....

____________________





शुक्रिया हिंदी ||

नहीं कह पाता गैरो की जुबा में

अपनी कहानी |

मेरे आँखों को अच्छी लगती है

सिर्फ अपनी भाषा में लिखी

अपनी जुबानी ||
______

प्यार के संवाद तो, दिल से निकलते हैं

उनका अंगेरजी अनुवाद कैसे बनाऊ

मेरा दिल तो हिंदी है

उसपर अंगेरजी की परत कैसे लगाऊ ||
____


दिल की परतो को

जब भी शब्दकार की छुरी से कटा

वो निकली आह , हिंदी ही थी |

लगाया था मरहम जिसने

खुद को खर्च करके

वो हमदर्द, वो दिन भी

हिंदी ही थी ||
____

न जाने कितनो ने दफनाना चाहा

समय की मिटटी में तुम्हे , मुर्दा कह के |

तुम फिर भी रही जिंदा

दिलो में हमारे , हमारी जुवा बन के ||
_____

आज हिंदी दिवस पे

हर कबि का, तुम्हारे लिए पैगाम है |

तुम्हारे संघर्ष को

हम सभी का , सलाम है ||
________________

बेबस नहीं रहना है ||

क्या आँशु बहाने के सिवा कुछ और करना, नहीं है सिर्फ धमाको से ही मरना सही है ||
जब तक डरते रहोगे, डर से ये खोखले टोपीवाज  डराते रहेंगे | आतंक के खिलाफ जंग जारी है कह कह  के हर लाश पे वो, मुस्कुराते रहेंगे ||
मन में दबाये बैठे हम इस गुस्से से क्या कर पाएंगे | फटेगा तो अन्दर ही फटेगा उस नहीं तो, इस धमाके से बेमौत मारे ही जायेंगे ||

डरते नहीं हैं ये टोपीवाज़, आतंक से अपना कोई आज तक, मरा ही नहीं कभी उठाई नहीं लाशे, अपने बच्चो की इसलिए शायद , आँखों का तालाब कभी भरा ही नहीं ||
कोई नहीं जलाएगा मशाल अपने लिए हमारे मन का अँधेरा है खुद ही जलाना होगा | छोड़ दे विश्वास  , इन टोपिवाजो से  शायद , अब आतंक से लड़ने हमे , खुद ही को आगे आना होगा ||

जय हिंद !!

आजाद हो ||

हाथ में नहीं तो दिल में मशाल जलाये रखना है
देख नहीं सकते, गद्दारों को लुटते अपने वतन को हर आँख को अब हमे, जगाये रखना है __
जब तक आवाज है सीने में
आजाद हो
जब तक डर नहीं है जीने में आजाद हो ...

देख कर बेगुनाहों पे सितम
कुछ होता है अगर तो आजाद हो ...

है अगर गद्दारों से
लोहा लेने का जिगर
तो आजाद हो ...
कर लो खुद से वादा
आजाद ही रहना है , जिंदा हूँ जब तक
बेड़िया न डाले कोई , जिन्दा हूँ अब तक करते रहोगे जब तक ज़द्दो ज़हद
तो आजाद हो , .............................

अपना ले ज़िन्दगी ...

(मेरा नया गाना ज़िन्दगी से कुछ मांगते हुए किरदार के बारे में है !! मैं ज़ल्द ही इसे you Tube  पर अपने आवाज में upload  करूँगा )
मैं   जीना  चाहता  हूँ   , अपना  ले  ज़िन्दगी कुछ  उड़ना  चाहता  हूँ   , पंख  लगा  दे  ज़िन्दगी बीते  हैं  पल  जो  प्यार  के  , उसे  ला  दे  ज़िन्दगी
बतला  दे....  ज़िन्दगी  …..हे  ये  हे  ये  हे हे  , हे  हे  हे हे

कुछ  कशमकश  सी  है  , सुलझा  दे  ज़िन्दगी
गहरे  अंधेरो  में   , कुछ  जला  दे  ज़िन्दगी हूँ  रौशनी  से  रूबरू  , मिला  दे  ज़िन्दगी
बतला  दे....  ज़िन्दगी  , .... हे ये हे ये हे हे , हे हे हे हे

….
कुछ  गाना  चाहता  हूँ  , गुनगुना  ले  ज़िन्दगी
बिखरे  है  सुर  जो  सारे  , साथ  ला  दे  ज़िन्दगी
अहसान  तेरा  बहुत  होगा , दिल  लगा  दे  ज़िन्दगी
बतला  दे.......  ज़िन्दगी  , .... हे ये हे ये हे हे , हे हे हे हे


कुछ  कसूर  मुझपे  हैं  , ना  सज़ा  दे  ज़िन्दगी
पा  लूँ   मंजिले  मै   , कुछ  दिखा  दे  ज़िन्दगी
भटका  हूँ   मै  बहुत  , अब  बसा  दे  ज़िन्दगी
मुझे बचा   ले .... ज़िन्दगी . ..... हे ये हे ये हे हे , हे हे हे हे
हु उ हु हु हु ... हु उ …

गैर

उन्हें  जन्नत   दी  है  तोफे  में
हमे  तो  दोजख   में  भी  ठिकाना  ना   मिला

हर  दुआ  और  दवा  उनको  मिली

हमे  तो  दर्द  बताने  का  भी , बहाना ना   मिला ||



की  परदे  में  हम  हैं

या  उन्होंने  चेहरा  छुपा  लिया 

नज़रो  से  मिलती  नज़र  नहीं  आज  कल , तो  

हमे  भुलाने  का  बहाना  बना  लिया  ||



बिछी  हर बिसात उनके  लिए
हमे  तो  जंगे   जहद  से  ही  निकाल  डाला

हर  फतह  में  नामो  –शोहरत   मिली  उनको

हमरे  खून  को  तो उन्होंने , पानी  बना  डाला  ||



इस  अंधेर  नगरी  में  

अंधो  का  बोलबाला  है

शोर  माचाने  बाले  जिंदा  रहते  है  यहाँ

आँख  वालो  का  मुह  काला  है  ||

क्रांति का बिगुल !!

ये आंधी जो है चल पड़ी उसे जगा , तू दम दिखा बुझा सा जो दिल में है उसे जगा, तू दम दिखा || ये ज़ुल्म न सहेंगे हम बहुत सितम वो कर चुके गिरे जो लाल रक्त हैं उसे जला , तू दम दिखा || आज ही वो वक़्त है बदलना हमको तख़्त है कदम मिला कदम मिला तू दम दिखा , तू दम दिखा _______________________
अन्ना तू चिंगारी है उन काले चेहरों पे भरी है | भागो ए गद्दारों गद्दी से आ गए क्रांतिकारी हैं || ________________________

इश्क की इम्तिहा

किसी के इश्क की इम्तिहा न ले कोई
किसी के सब्र की इंतिहा न हो जाए
प्यार मर न जाए प्यासा यु ही
और आंशुओ के सैलाब में
ज़िन्दगी न बह जाये …
________________________
कब्र जब भी खुदे हैं प्यार के
आसमा से , खुदा की आह निकली है
प्यार अकेला सही , पर बेबस नहीं
कही खुदा की निशाने पे ,
बेदर्दो के जिगर न आ जाये
____________________________
बहुत नाजुक है उनके लवो पे लगी दुआए
इतनी जोर से न हिलाओ की ये ज़मी पे आ जाए
उन्ही की दुआ से झिलमिला रहे हैं चमन तेरे
कही उनकी दुआओं में कोई कमी न आ जाए
____________________________
दिल के निशानों को
क्यों वक़्त के पानी से धोने चले हो
कही निशानों के साथ तेरी
रूह की तस्वीर न मिट जाए …
चन खुशियों के लिए खुद को बदलो न यु
की बे-रूह ये खुशिया , शायद , कुछ काम न आये

_______________

देखो न क्या हुआ

कह दू कुछ तुमसे
या चुप रहूँ
बोलो न मुझ से
मै क्या करू
देखो न क्या हुआ
प्यार तो नहीं , प्यार तो नहीं ||२
______________________  
घूमता रहता हूँ बारिसो में
ठंड लगती नहीं है हवाए
इस गली उस गली
बेबजाह ही
ढूंढ़ता हूँ तुम्हे आज कल मै
खुद से ही, नज़रे बचाए...
प्यार तो नहीं , प्यार तो नहीं|| २
______________________

आया है मौसम देखो दिलो का
प्यार कर ले मुझे टूट कर तुम
फिर चली जाएँगी ये बहारे
यादो के बस रहेंगे सहारे
फिट ढूंढेगे हम तुमको कहा रे...
प्यार तो नहीं , प्यार तो नहीं ||२
____________

हर कतरा मेरे पागल दिल का
बस तेरा ही कहा मानता है
कुछ सुनता नहीं ये मेरा तो
अब तुझे ही खुदा जानता है
अब खुदा से हम क्या छुपाये...
प्यार तो नहीं , प्यार तो नहीं|| २

Snap from morkut.com

Ho Jaaye...

मृग कस्तूरी

किसी के संग के बिना
कितनी अधूरी सी लगती है
ये ज़िन्दगी कभी एक मृग 
कस्तूरी सी लगती है 
:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(
थामे खुद का हाथ
करते खुद से बात
भागते एक शहर
से दुसरे शहर
ये कितनी
गैरज़रूरी सी लगती है
ये ज़िन्दगी कभी एक मृग
कस्तूरी सी लगती है
:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(
ऊपर और ऊपर
उससे , सबसे
जाने किस किस से
इसी फ़िक्र में
ये कितनी जिहजुरी
सी लगती है
ये ज़िन्दगी कभी एक मृग

कस्तूरी सी लगती है
:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(:-(