Wednesday, June 29, 2011

तेरी आँखों में - मेरी आवाज में

मैंने अपनी एक शायरी को अपनी आवाज़ देने की कोशिश की है | अभी भी सुधार की जरुरत है , पर एक पहला प्रयास  है |
http://www.youtube.com/watch?v=mygGATlbyaI



2 comments:

  1. आवाज भी कर्णप्रिय लगी और ग़ज़ल भी अच्छी है - शुभकामनाएं

    ReplyDelete

कुछ कहिये

Random thoughts ...

Random thoughts ... क्यू गुमसुम सी रहती हो , हवाओं की तरह , लहराओ न कभी । उङ जाती हो पलक क्षपकते ही , साथ आओ न कभी ।। कुछ लम्हों की...