Saturday, June 05, 2010

तूफ़ान आते हैं

अँधेरी रातो में
तूफ़ान आते हैं
पता किसी को भी नहीं चलता
बरबादी फिर भी मचाते हैं ||
कही  दिल कुचले जाते हैं
कई  सपने दफ़न हो जाते हैं
आँखों को भी नहीं चलता
बरबादी फिर भी मचाते  हैं
अंधेरी रातो में
तूफ़ान आते हैं ||
हवाए तेज होती हैं बहुत
अरमानो के काटो में फसती  नहीं
दिल को चिर के निकल जाती हैं
पता दिल को भी नहीं चलता
बरबादी फिर भी मचाते हैं
अंधेरी रातो में
तूफ़ान आते हैं ||
दिखता सब है अंधेरो को
अंगूठा दिखाती है सवेरो को
जो ना देख पता हैं मन के वाबंदर को
उबल रहें घनघोर समुन्दर को
जो इंसान बनाते हैं
इसलिए
अँधेरी रातो में
तूफ़ान आते हैं
पता किसी को भी नहीं चलता
बरबादी फिर भी मचाते हैं ||
picture used from http://mdb2.ibibo.com


3 comments:

  1. अँधेरी रातो में
    तूफ़ान आते हैं
    पता किसी को भी नहीं चलता
    बरबादी फिर भी मचाते हैं ||
    किसी के दिल कुचले जाते हैं
    तो किसी के सपने दफ़न हो जाते हैं

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  2. ... सुन्दर रचना!!!

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  3. सुन्दर अभिव्यक्ति..

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