Tuesday, June 15, 2010

ये कैसा समाज !!!

जब जब कमजोरो और कुचलो पे (Ref to recent train killing)
जुल्म कही हो जाता है
कम्बल ओढ़ के ये समाज
दूर कही सो जाता है ||
वही बेबस कुचलो से कोई
जब आगे बढने आता हैं
दैत्य बन के फिर वही समाज
सामने खड़ा हो जाता है ||
कुछ पता नहीं क्यों मुझको
कुछ खास समझ नहीं आता हैं
मर जाते हैं हजारो बेमतलब ही (ref to bhopal gas killing)
तब क्या समाज तेल लेने जाता है ||
जब आती हैं न्याय करने की बारी
कोई खड़ा नहीं हो पाता है
बाहुवली और बलशाली के पीछे
खुद को खड़ा वो पाता हैं || (Congress full supporting its act to send anderson back)
लुटती है इज्जत जब चलती ट्रेनों में
कोई कहाँ  बचाने आता हैं
ये धरम करम का  रखवाला
क्या गा&**&%  मा%^^& जाता हैं(this is wht i want to write but....)
क्यों कायर इतना बन जाता है ||  

6 comments:

  1. बहुत ज़बरद्स्त ..........

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  2. very well said..its reality
    hats off to u sir ji..
    bahut achha likhte hain aap.

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  3. ...बहुत खूब!!!

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  4. समाज के वर्तमान हालात में एक संवेजनशील व्यक्ति का आक्रोशित होना लाजमी है...सही कहा आपने कितनी ही बौद्धिक बहसे कर ले पर महत्वपूर्ण बात तो पीङित को न्याय मिलना ही है....सार्थक अभिव्यक्ति..बधाई।

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  5. आज जो समाज में हो रहा है..उन हालातों पर आक्रोशित होना लाज़मी है...और एक संवेदनशील मन से क्षुब्ध हो कर ऐसे ही शब्द निकलते हैं....सार्थक लेखन

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