Thursday, June 17, 2010

एक भारतीय की कहानी ...

मै भारत का साधारण नागरिक हूँ
पूरा भारत मेरा परिवार है
कुछ एक फसादों को छोड़  दो
तो मुझे हर भारतवासी से प्यार है ||
पर,
मेरे कुछ भाई ट्रेन धमाके में मरे गए
कुछ बंधू गोकुल चाट खाते खाते
अल्ला को प्यारे हो गए
कुछ औरो को आतंकियों ने भुन डाला
चहकती महकती मुंबई की गलियों को
इन दरिंदो ने सुना कर डाला ||
फिर,
कुछ भाई बहनों को
निठारी के दैत्यों ने चबा डाला
जो बचे उन्हें समाज के ठीकेदारो ने
डायन कह के , जिंदा ज़ला डाला ||
भारत मेरी माँ हैं
सोचा था भारत में माँ को तो सम्मान देंगे
कहाँ  पता था चन रद्दी नोटों के लिए
कुछ मेरे ही भाई , अपनी माँ को बेच देंगे ||
अब
मेरा परिवार तर बतर हो गया हैं
कोई फॉरवर्ड कोई बैकवर्ड तो कोई SC/ST हो गया है
प्यार के रिस्तो का टेस्ट कोई खेलता नहीं
सबकी पसंद 20/20 हो गया है ||
हमारे रखवाले ही आज कल
हमारे हत्यारों से हाथ मिला रहें हैं
इसलिए तो सत्ता में बैठे मेरे बंधू जन
हमे छोड़ , भगोड़े anderson को अपना यार बता रहें हैं ||
(Anderson is prime accused in Bhopal gal tragedy that took more than 15000 indian lives , he was escorted freely from India to US by our own indian govt. , Arjun singh was CM of MP that time , and Late Rajiv Gandhi was PM and external affairs minister of India.))        

  

2 comments:

  1. ... बेहतरीन रचना,बधाई!!!

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  2. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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