Wednesday, October 27, 2010

मेरा बिहार !!! (Republished)

मेरा जन्म  बिहार के एक शांतिपूर्ण कस्बे में हुआ था , धीरे धीरे पूरा बिहार एक जंगल राज में बदल गया !! मेरी पंक्तिया उन्ही लम्हों को बयां करती हैं !!! मुझे पूरी आशा है , किसी दिन वहा उजाला तो होगा , पर तब तक मेरा इंतज़ार कायम रहेगा !!


कभी  हसती  थी  फिजाए  जिन   गलियों  में . 
वहां   अब  सन्नाटो के  जाल  बिछे  हैं  . 
नन्हे  पैरो   की  छाप  जहाँ   छोड़  रखी थी  मैंने  
वहां  आंशुओ  के  लम्बे  नहर  बन  चुके  हैं  
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दह  गयी  है  वो  दीवारे ,जिनके  पीछे  हम  छुपा  करते  थे  
बह  गए  है  वो  दरख़्त ,जो  वहां खड़े  रहते  थे . 
जहाँ   रहती  थी  अक्सर  रौशनी  की  लम्बी  परछाईया       
वहां  अब   दिए  भी  जला  नहीं  करते  हैं  
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बिखरी  ज़िन्दगी  के  पल  बचते  छुपते  रहते  हैं . 
दिन  रात  के  अंतर   खत्म  हो  रहे  हैं . 
लाल  आँखों  से  निकली  चिनगारिया  ही  दिखती   हैं . 
मोम  से  बने  दिल  भी  सख्त   हो  रहे  हैं  
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किधर  जाए  क्या  पता ,राहों  के  निशा   धुल  गए  हैं . 
सुनसान  अंधेरो  में  खूखार  भछक  घूमते  हैं . 
बरसो  से  अब  मेरे  नन्हे  पैरो    की  आहट  नहीं  पड़ती  
और  मौसम  के  सरगम  धीरे  धीरे  छुप  रहे  हैं . 
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 चित्र http://www.scaryforkids.कॉम से लिया हुआ 

2 comments:

  1. इस शानदार रचना पर बधाई ....जैसे मैंने पहले भी कहा है....बहुत सुन्दर भाव भर दिए हैं आपने ....और तस्वीर के चयन में आपकी पसंद की दाद देता हूँ |

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  2. truly brilliant..
    keep writing........all the best rahul ji..

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