Saturday, December 25, 2004

Bewafa.2

तेरी  बेवफाई  ने .... जीना  सिखा  दिया
आँखों   से  गिरते  नहीं  आसू
तुमने  दिए  हैं  इतने  सितम
की............
वक़्त  ने,  आंशुओ को  पीना  सिखा  दिया....
..........................
उम्मीद  ना  थी  जितनी
उतने  रंग  तुमने  बदल  डाले  हैं
सबने  प्यार  को  खुदा  माना  हैं
तुमने  तो  इसके  मायने  ही  बदल  डाले  हैं .
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भरे  नहीं  है , ज़ख्म  दिल  के
हम  मरहम   लगाना  भी  नहीं  चाहते
अच्छा  हैं......
तेरे  सितम  हरे  ही  रहें
हम  उन्हें.....
भुलाना  भी  नहीं  चाहते
..............................
जो  कुसूर  हुआ  है  इस  दिल  से  
उसके  निशा  शायद  दिल,   मिटा  नहीं  पायेगा
इस  कदर  बेवफाई  जो  की  है  आपने
दीवाना  उसे  कभी , भुला  ना  पायेगा  
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