कुआं, तू बुझा देता है सबकी प्यास
फिर तेरी प्यास कौन बुझाता है?
सबको घर ले जाने वाले, ओ रास्ते
तुझे मंजिल कौन पहुंचता है ?
जला कर खुद को, रौशन करने वाले
ए आग , तुझे अंधेरे से कौन बचाता है ?
सब को देने वाले , परबरदिगार
क्या तुम्हे भी कोई खुशियां दे जाता है?
No comments:
Post a Comment
कुछ कहिये