जो रोए न इश्क़ में तो, इश्क़ कैसा
जब तक जान पे न बन आए, तो रिस्क कैसा ।
कफ़न बांध के निकले हैं, तुम्हे पाने के लिए
अब ये सांसें ही बची है , गंवाने के लिए ।।
~राहुल
शब्दों की गहराई अचूक है !! जब साथ हो जाती है तो नयी दुनिया बना लेती है !! मैं इन्ही शब्दों का शब्दकार हु , शब्दों से खेलना मेरी आदत , शब्दों में जीना मेरी हसरत !! जुडये मेरे साथ , कुछ सुनिए कुछ सुनाइए , एक दुसरे का हौसला बढाइये||
Thursday, October 09, 2025
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