Friday, June 17, 2005

Rahte hai

अपने  दिल  से  तेरी  यादो  को  
हर  रोज  मिटाते  ही  रहते  हैं
किसी  तरह  जी  जाए  कुछ  दिन
इसलिए  ना  जाने  क्या  क्या
बहाने , बनाते  ही  रहते  हैं
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अपने होटो   से  बार  बार
तेरा  नाम  छुपाते  ही रहते  हैं
धुल  जाए  पुरानी  बाते  और  किस्से
इसलिए  होटो   पे  कोई  ना  कोई  गीत
लाते  ही  रहते  हैं
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घर  का  दिया  ही  फिर  जला  ना  दे  ज़िन्दगी  को
दिल  के  हर  चिराग  बुझाते  ही  रहते  हैं
नहीं  कर  पाते  भरोसा  अपनों   पे  अब  
गैरो  से  हाथ  मिलते  ही  रहते  हैं
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देख  ना  ले  तेरे  आँसू  मेरे  आँखों  में  कोई
इसलिए  आंसुओ  को  सबसे  छिपाए  ही  रहते  हैं
बदनाम  ना  कर  दे  मेरी  कहानी  तुम्हे
इसलिए  तेरे  बेवफाई  को
दिल  में  दबाये  ही  रहते  हैं
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