अपने दिल से तेरी यादो को
हर रोज मिटाते ही रहते हैं
किसी तरह जी जाए कुछ दिन
इसलिए ना जाने क्या क्या
बहाने , बनाते ही रहते हैं
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अपने होटो से बार बार
तेरा नाम छुपाते ही रहते हैं
धुल जाए पुरानी बाते और किस्से
इसलिए होटो पे कोई ना कोई गीत
लाते ही रहते हैं
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घर का दिया ही फिर जला ना दे ज़िन्दगी को
दिल के हर चिराग बुझाते ही रहते हैं
नहीं कर पाते भरोसा अपनों पे अब
गैरो से हाथ मिलते ही रहते हैं
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देख ना ले तेरे आँसू मेरे आँखों में कोई
इसलिए आंसुओ को सबसे छिपाए ही रहते हैं
बदनाम ना कर दे मेरी कहानी तुम्हे
इसलिए तेरे बेवफाई को
दिल में दबाये ही रहते हैं
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शब्दों की गहराई अचूक है !! जब साथ हो जाती है तो नयी दुनिया बना लेती है !! मैं इन्ही शब्दों का शब्दकार हु , शब्दों से खेलना मेरी आदत , शब्दों में जीना मेरी हसरत !! जुडये मेरे साथ , कुछ सुनिए कुछ सुनाइए , एक दुसरे का हौसला बढाइये||
Friday, June 17, 2005
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