Friday, January 07, 2005

Nisaan

आखरी  ज़ख्म जब तक , दिल  पे  रहेंगे
हम  तुम्हे तब  तक , याद  करते  रहेंगे
भुला  ना  पाएंगे  आखरी  दम  तक
और  हर  निशा  को , दिल  में   जिंदा  रखेंगे
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रहेंगे  अकेले  या  भीड़  में
तेरी  तन्हाइयो  को , महसूस  करते  रहेंगे
ज़िन्दगी  अकेली  तो  होगी  तेरे  बिन
फिर  भी  मौत  से , हमेशा  लड़ते रहेंगे
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आबाद  रहेंगे  तेरे  सपनो  से , बाग़   दिल  के
चाहे  काटे  ही  इसमें  , क्यों  ना  खिलेंगे
तेरी  उम्मीद  हमेशा  रहेगी  मुझको
भले  ही  आप  हमसे  कभी  ना  मिलेंगे
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हर  लम्हा  उन्  राहों  में  लौटेंगे  जरुर
मिले  ना  मिले  तेरे  कदमो  के  निशा
लड़ते  रहेंगे  वक़्त  से , कोई  साथ  हो  ना  हो
हर  घडी   देते  रहेंगे , प्यार  के  इम्तिहा  
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