Thursday, January 20, 2005

Karib

अक्स  होते  अगर  तेरे  आँखों  के  हम  
तो  तेरे  गालो  को  छु  कर ,हलके  से  गुजर  जाते  
चन  लम्हों  की  होती  ज़िन्दगी , गम  नहीं  
कम  से  कम  तेरे  होटो  को  तो  छु  जाते  
.........................
हर  लम्हों  को  छुपा लेते ऐसे   
तेरी  यादो  को  सीने  से  लगा  लेते  ऐसे   
मिल जाता  हो  किनारा ,लहरों  से  जीत  कर  
तेरी  तस्वीर  को  दिल  में  बसा  लेते ऐसे
.................................
होते   जो  हवाए  पुर्वयियो  की  
तो  तेरी  घनी  जुल्फों  में , झूल  जाते  
इस  तरह  महका  जाते , रास्तो  को  तेरे  खुशबू  से  
की  लोग  अपनी   मंजिल  का  पता  भी  भूल  जाते  
.....................................
अगर  होते  रौशनी  की  पहली  किरण  
तो  पलकों  की  चादरों  पे ,हर  रोज  दस्तक  देने  आते  
उलझे  तेरे  बालो  के  बीच  से ,हौले   से  अपना  रास्ता  बनाते  
और  झुकी  झुकी  तेरी  आँखों  को , रौशनी  से  नहा  जाते  
........................

No comments:

Post a Comment

कुछ कहिये

एक नज़र इधर भी

कभी देख लो एक नज़र इधर भी की रौशनी का इंतज़ार इधर भी हैं मुस्कुरा के कह दो  बातें चार की कोई बेक़रार इधर भी हैं || समय  बदलता रहता हैं हर...