Sunday, January 08, 2006

Kaash..

तेरी तन्हाई के जख़्मो को
आज तक आसूओ से सी रहे है
भर जाएँगे ज़रूर यही सोच कर
कतरा कतरा हर दिन जी रहे है
...
काश तुम्हे बता पाते
जो आप मेरे दर्दो  के थोड़े करीब होते
अकेले ही रोते है तेरे यादो मे
काश
आप भी कभी मेरे गमो मे शरीक होते
..
सपने टूटने का गम  नही है उतना
जितना आपसे बिछड़ जाने का अहसास है
आप हो गये है इतनी दूर तो
 फिर आपके गम
 क्यू इतने पास है


सुकून नही है एक पल इस ज़िंदगी मे
तार तार हो गये दिल को देख कर
पल पल बेबस हुए जाते है
काश आपको बता पाते अपनी  हालत
की क्या होता है जब अपने  इस कदर
दूर चले जाते है...

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