किसी के पास आ के
उसके बाहों में समां जाना,चाहते है
ख़ुद के लिए जी लिया बहुत
अ़ब किसी के रंगों में नहा जाना चाहते है
...
प्यार की धुप जो, है चमक रही नभ पे
उसे आँखों में बसाना चाहते है
हम भी ये तन्हा दिल अब
किसी से लगाना चाहते है
...
मुस्कुराना चाहते है साथ किसी के
किसी के साथ आंसू बहाना चाहते है
जिंदगी के हर किस्से को शब्द पर शब्द
किसी को सुनना चाहते है
...
मिली नही है अब तक
ये तलाश आगे बढ़ना चाहते है
मंजिले मिले न मिले उनसे
राहो को साथ मिलाना चाहते है
शब्दों की गहराई अचूक है !! जब साथ हो जाती है तो नयी दुनिया बना लेती है !! मैं इन्ही शब्दों का शब्दकार हु , शब्दों से खेलना मेरी आदत , शब्दों में जीना मेरी हसरत !! जुडये मेरे साथ , कुछ सुनिए कुछ सुनाइए , एक दुसरे का हौसला बढाइये||
Wednesday, February 14, 2007
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आज़ाद
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