ये कैसा सरकार ने कदम उठा रखा है
जंग गरीबो पे खतरनाक चला रखा है
गरीबो को हटाना है, उन्ही के देश से
प्याज की बढती कीमत तो एक बहाना है
__________________
दो बूँद पानी की मिल जाए , शुक्र है
हम गरीबो को और, क्या ज्यादा सुख है
लूटने के लिए सारा देश तो दे रखा है
अब क्या हमारी आत्मा से भी बैर निभाना है
________________
लाल बत्ती के शोर में गुम है इतने
हमारी आँखों से गिरते आँसू की आवाज ,
कहाँ सुन पाएँगे
आतंक से जंग तो जीत नहीं पाए
अब क्या हम गरीबो के सीने पे
बन्दूक चलायेगे ??
_____________________
शब्दों की गहराई अचूक है !! जब साथ हो जाती है तो नयी दुनिया बना लेती है !! मैं इन्ही शब्दों का शब्दकार हु , शब्दों से खेलना मेरी आदत , शब्दों में जीना मेरी हसरत !! जुडये मेरे साथ , कुछ सुनिए कुछ सुनाइए , एक दुसरे का हौसला बढाइये||
Thursday, December 23, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
आज़ाद
नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...
-
किसी के इश्क की इम्तिहा न ले कोई किसी के सब्र की इंतिहा न हो जाए प्यार मर न जाए प्यासा यु ही और आंशुओ के सैलाब में ज़िन्दगी न बह जाये … ...
-
नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...
-
मंजिलो में चलते चलते कुछ राह बदल जातें हैं शुरुआत कहाँ होती है ये ख्तम कहीं होते है .... अक्सर राहो में चलते चलते हमराह बदल जातें है एक मोड़...

... bahut sundar ... prasanshaneey rachanaa !!!
ReplyDeletebahut sunder aur maarmik rachna
ReplyDeleteलूटने के लिए सारा देश तो दे रखा है
ReplyDeleteअब क्या हमारी आत्मा से भी बैर निभाना है
________________
वो कहेंगे -
एक देश से मेरा क्या होगा ? मेरी आत्मा को तो तभी चैन आएगा जब मैं देश की एक अरब जनता का खून चूस लूँ।
.
aam admi ki awaj utha rahi hai aapki janvadi kavita..
ReplyDeletekranti ka avahan...
राहुल जी कविता के भाव बहुत अच्छे हैं आपमे कविता लिखने की सामर्थ्य है लेकिन ये कविता अभी कुछ और काम माँगती है। एक बार दोबारा देखें लाजवाब रचना बन जायेगी। शुभकामनायें , आशीर्वाद।
ReplyDeleteशुक्रिया , आपके समर्थन का ,
ReplyDelete