( I am deeply hurt by death of 70 + people on suspected Maoists blast!!i am angry on killers..but i am more angry on people who have failed us.)
वो बंद कमरों में , चरखा चला रहें हैं ..
कोई देखो , बाहर खुनी , कत्लेआम मचा रहें हैं ...
.......
गुम हैं ठंडी हवाओ के शोर में इतना ..
मजबूर जनता का शोर , नहीं सुन पा रहें हैं ...
नंगा कर दिया हैं इन पापियों ने , मजबूर लोगो को
वो साहब बंद कमरों में चरखा चला रहें हैं ...
......
वो खून की होली हर रोज खेलते जा रहें हैं
कभी स्टेशनों , कभी पटरियों पे , लहू नज़र आ रहें हैं ,
ये व्यस्त हैं चूजों की गिनतियो में ,
घर बैठे गाँधी टोपी बना रहें हैं
....
हक़ नहीं हैं इन लोगो को एक दिन और जीने का
आँखे खोल जो जानता को मरते देख रहें हैं
कैसे दरिन्दे हैं उजली टोपी पहने
भूकी जानता को आन्गिठेयो में सेक रहें हैं
शब्दों की गहराई अचूक है !! जब साथ हो जाती है तो नयी दुनिया बना लेती है !! मैं इन्ही शब्दों का शब्दकार हु , शब्दों से खेलना मेरी आदत , शब्दों में जीना मेरी हसरत !! जुडये मेरे साथ , कुछ सुनिए कुछ सुनाइए , एक दुसरे का हौसला बढाइये||
Friday, May 28, 2010
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आज़ाद
नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...
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किसी के इश्क की इम्तिहा न ले कोई किसी के सब्र की इंतिहा न हो जाए प्यार मर न जाए प्यासा यु ही और आंशुओ के सैलाब में ज़िन्दगी न बह जाये … ...
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नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...
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मंजिलो में चलते चलते कुछ राह बदल जातें हैं शुरुआत कहाँ होती है ये ख्तम कहीं होते है .... अक्सर राहो में चलते चलते हमराह बदल जातें है एक मोड़...
...बेहतरीन ... प्रसंशनीय !!!
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