तेरे तन्हइयो के गम में
हम बार बार मरते रहे
हर सास बोझ लगती थी हमे
इसलिए दिल के बोझ , बढते रहें||
...
उठाया नहीं गया एक दिन
ये बोझ मुझपे भारी से हो गए
ज़ला डाला दिल को, टुकडो में काट कर
आंशुओ के सैलाब में , ये कतरा कतरा बह गए ||
......
दिल जो ना रहा, मन ,खाली सा हो गया
चिराग बुझ गए तो , मैं सवाली सा हो गया
कम से कम जुड़े थे, तेरे तन्हइयो की यादो से
अब तो बेदिल मैं , भिखारी सा हो गया ||
....
भटका कहाँ कहाँ , मैं खुशियों की दौड़ में
गया जहाँ भी, दिलजले मिले
खुदा से मांगी मोहलत , मोहब्बत के नाम पे
की आधी ज़िन्दगी तो मैंने , कतरों में काट दी ||
......
दिखा आइना मुझे , उपरवाला भी हस पड़ा
दी तुम्हे चाहत का तोफा , तुमने क्या समझ लिया
रख लेते उसे एक कोने में , कहाँ पूरा दिल चाहिए था
ऐसी अनमोल यादो के , तुमने कतरों में बदल दिया||
.....
आपने नादानी पे , हम खुद ही हस पड़े
एक हीरा था मेरे पास , ना समझ सके
कद्रदान था खुदा , मुझपे फिर इंनायत हुई
इसबार हम प्यार को , कतरा ना होने देंगे
तन्हाई , दूरिया , दर्द या खुशी मिले जो भी
हम फिर से इन्हें, खुदा कसम , बोझ ना कहेंगे |
शब्दों की गहराई अचूक है !! जब साथ हो जाती है तो नयी दुनिया बना लेती है !! मैं इन्ही शब्दों का शब्दकार हु , शब्दों से खेलना मेरी आदत , शब्दों में जीना मेरी हसरत !! जुडये मेरे साथ , कुछ सुनिए कुछ सुनाइए , एक दुसरे का हौसला बढाइये||
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आज़ाद
नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...
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किसी के इश्क की इम्तिहा न ले कोई किसी के सब्र की इंतिहा न हो जाए प्यार मर न जाए प्यासा यु ही और आंशुओ के सैलाब में ज़िन्दगी न बह जाये … ...
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मंजिलो में चलते चलते कुछ राह बदल जातें हैं शुरुआत कहाँ होती है ये ख्तम कहीं होते है .... अक्सर राहो में चलते चलते हमराह बदल जातें है एक मोड़...
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"तेरे तन्हयियो के गम में
ReplyDeleteहम बार बार मरते रहें
हर सास बोझ लगती थी हमे
इसलिए दिल के बोझ, बढते रहें||"
टाइपिंग की गलतियों को सुधार लें तो बेहतर होगा
yes sir!! done!!
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