शब्दों की गहराई अचूक है !! जब साथ हो जाती है तो नयी दुनिया बना लेती है !! मैं इन्ही शब्दों का शब्दकार हु , शब्दों से खेलना मेरी आदत , शब्दों में जीना मेरी हसरत !! जुडये मेरे साथ , कुछ सुनिए कुछ सुनाइए , एक दुसरे का हौसला बढाइये||
Friday, May 21, 2010
बिछोह
अहू अहू करे , दिलवा हमार
कहे नहीं कुछ भी , कभी
कभू करे बतिया हज़ार
अहू अहू करे
दिलवा हमार
...
टुक टुक देखे , कभी
खोले किबाड़
कैसन कैसन बतिया , आये मन में
डर लगे है , सरकार
कैसे खोले हम किबाड़
अहू अहू करे ...दिलवा हमार
....
जला हाउ दिलवा ऐसे
चूल्हा में कोयला जैसे
हो ना जाये राख , दिलवा हमार
.....
किते दिन बीते है रोज
बीते नहीं विरहा के शोर
खट्टे से लगे है पल
डंक कटे हैं जोर, बिछुवा हज़ार
अहू अहू सा करे हैं , दिलवा हमार
....
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आज़ाद
नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...
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किसी के इश्क की इम्तिहा न ले कोई किसी के सब्र की इंतिहा न हो जाए प्यार मर न जाए प्यासा यु ही और आंशुओ के सैलाब में ज़िन्दगी न बह जाये … ...
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नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...
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मंजिलो में चलते चलते कुछ राह बदल जातें हैं शुरुआत कहाँ होती है ये ख्तम कहीं होते है .... अक्सर राहो में चलते चलते हमराह बदल जातें है एक मोड़...

हर रंग को आपने बहुत ही सुन्दर शब्दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्तुति ।
ReplyDeleteThanks Sanjay!!
ReplyDeletebadhiya.. likhte rahiyega..
ReplyDeletecheck
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