ये ज़मी ये आसमा
छोड़ कर इसे कहाँ जाऊ
बसी है इस मिट्टी की खुशबू
मेरी सासों में
इस खुशबू को खुद से
कहाँ छुपाऊ ||
मेरा देश तो मेरा है
इसे छोड़ के
घर कहाँ बसाऊ
मकान तो कहीं भी बना लूँगा
पर समां सकूँ अपने देश को इसके अन्दर
इतनी जगह मै कैसे लाऊ||
मुझे बताओ
की एक मकान को
अपना मुकाम मै कैसे बनाऊ
मेरा दिल तो हिंदी है
इसे कोई और भाषा कैसे समझाऊ
कुछ बाते तो मुझे हिंदी में ही अच्छी लगती है
भला हर बातो का अंग्रेजी अनुबाद कैसे बनाऊ ||
शब्दों की गहराई अचूक है !! जब साथ हो जाती है तो नयी दुनिया बना लेती है !! मैं इन्ही शब्दों का शब्दकार हु , शब्दों से खेलना मेरी आदत , शब्दों में जीना मेरी हसरत !! जुडये मेरे साथ , कुछ सुनिए कुछ सुनाइए , एक दुसरे का हौसला बढाइये||
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आज़ाद
नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...
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किसी के इश्क की इम्तिहा न ले कोई किसी के सब्र की इंतिहा न हो जाए प्यार मर न जाए प्यासा यु ही और आंशुओ के सैलाब में ज़िन्दगी न बह जाये … ...
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नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...
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मंजिलो में चलते चलते कुछ राह बदल जातें हैं शुरुआत कहाँ होती है ये ख्तम कहीं होते है .... अक्सर राहो में चलते चलते हमराह बदल जातें है एक मोड़...
.... बेहतरीन!!!
ReplyDelete"मेरा दिल तो हिंदी है
ReplyDeleteइसे कोई और भाषा कैसे समझाऊ
कुछ बाते तो मुझे हिंदी में ही अच्छी लगती है
भला हर बातो का अंग्रेजी अनुबाद कैसे बनाऊ"
सच्चे और अच्छे उदगार
Rahul ki apki is rachna ko maine humara haryana blog par shaire ki hai
ReplyDeletehttp://bloggersofharyana.blogspot.com