Saturday, March 03, 2012

रिश्ता और मैं

कवि के शब्द : ये कविता के माध्यम से कवि आज कल के रिश्तों पे एक नज़र डालता है । थके हुए इन रिश्तों की दवा कुछ और है , और लोग इलाज कुछ और करते हैं ।।

सुराख़ इतने थे दिल में 
प्यार कतरा कतरा बहते रहे 
सूखता रहा समुंदर दिल का
हम झरना कही खोजते रहे ||

दिल बन गया मरासिम का कब्रगाह 
और हम कहीं  शमशानों में अपनों को ढूढते रहे 
जलता रहा हर रिश्ता धू धू कर 
हम बदलो से  पानी  को पूंछते  रहे ।।

वक़्त चलता रहा चाल अपनी
और लोग अपनी राहें बदलते रहे
होती गयी मेरी ज़िन्दगी खाली सी 
हम गड्ढो को भरने में लगे रहे ।।


अब शहरो में बस गए हैं हम
की तन्हाई की आदत जो लग गई  हैं 
लाखो चेहरों  में छुप कर सुकून मिलता है ,
भागते इन शहरो में ,  मेरी ज़िन्दगी 
कहीं तो रुक गयी है ।।

Wednesday, February 29, 2012

वो प्यार क्या हैं


[ कवि के शब्द : ये कविता उस प्यार उस रंग के बारे में हैं जो हमे नहीं दिखता । हर दिखने वाले प्यार के पीछे एक पूरक प्यार होता है जो मौन रहता हैं । सोचिये वो अंधेरो के बारे में जो चाँद के साथ रहते हैं , अगर वो अँधेरे न होते तो चाँद का वजूद क्या हैं , वैसे ही कुछ प्यार के बारे में ये कविता प्रकाश डालती हैं ]


कोई बताये मुझको ये तो
ये बला , प्यार क्या हैं
जो झुक गया हैं आसमा, तो
ज़मी का, इंतज़ार क्या हैं
लला लला ला ला लाला , लला लला ला ला लाला
जुजू जुजू जू जू जुजू , जुजू जुजू जू जू जुजू ,


किसी के वास्ते जो, खड़े हैं
आते जाते रास्तो में
जो रुक गया हैं वो मुसाफिर, तो
खुले किवाड़, घर के क्या हैं
लला लला ला ला लाला , लला लला ला ला लाला
जुजू जुजू जू जू जुजू , जुजू जुजू जू जू जुजू ,

बदल रहा हैं कोई मौसम
हवा कही बदल रही हैं
जो जल रहा चिराग वो हैं, तो
खड़ा अँधेरा, साथ क्या है ।।
लला लला ला ला लाला , लला लला ला ला लाला
जुजू जुजू जू जू जुजू , जुजू जुजू जू जू जुजू ,


दिखा रहा है कोई रिश्ता
कोई अनकहे  निभा रहा है
जिसे बुला सके सही वो
तो, रिश्ता अनाम क्या हैं ।।
लला लला ला ला लाला , लला लला ला ला लाला

जुजू जुजू जू जू जुजू , जुजू जुजू जू जू जुजू ,

Saturday, February 25, 2012

Re posting "Ho Jaaye" in my voice

http://www.youtube.com/watch?NR=1&feature=endscreen&v=HQWCBwPCqO0

"हो जाए"  , एक शाम और उसके  महफ़िल के बारे में हैं । शायर एक अच्छी शाम और उसके भावनाओ को दिखाना चाहता है ।।

Reposting "Teri Aankhon me" in my voice

http://www.youtube.com/watch?v=mygGATlbyaI

'तेरी आँखों में ' प्यार को बताने की एक शायराना कोशिश है।



Friday, February 17, 2012

प्यार का गम

कुछ मिले, तन्हाई के सिवा ,
ऐसी किस्मत नहीं लगती हैं
तक़दीर लिखी है जिसने मेरी ,
शायद उससे अब मेरी , नहीं बनती हैं
...
आधे  अधूरे ख्वाबो के दिल पे  ,
टुकड़े सारे फैले मिलते  हैं
उम्मीदों के चेहरों पे अब तो ,
कपडे भी अब, मैले  दिखते हैं ।।
 .....

खाली खाली ये दुनिया , तुम बिन
कहा अब अच्छी लगती है हमको
रख लो एक कोने में दिल के
नहीं अगर  है , शिकवा तुमको ।।
......

हर बात तुम्हे कह पाना मुश्किल हैं ,
बातो को तुमसे  , छुपाना मुश्किल हैं
हर पल कटते है , सालो के जैसे ,
अब सालो तुम बिन , रह पाना मुश्किल हैं ।।

Friday, December 23, 2011

कौन हो तुम||

ये गाँधी की टोपी
तो मेरे बाप की जागीर है |

कौन हो तुम , जो इसे पहन कर
मेरे दरवाजे पे चिल्ला रहे हो
क्या सोच कर
मेरे  साम्राज्य की नीब
हिला रहे हो  ||

न्याय , अन्याय की परख
तुम्हारे बस की बात कहाँ
कटघरा ही बस जगह है तुम्हारी
हमारी शान में गुस्ताखी करो
ऐसी तुम्हारी औकात कहा ||

आम आदमी हो , आम ही रहना सीखो
वरना गुठलियों की तरह चूस लियो जाओगे
बंद कर देंगे हुक्का पानी तो
हर बूंद के लिए तरस जाओगे ||

नादान, ये प्यार

कुछ खामोशियो से उलझी
लताएँ ||
दिल के दरारों से
उग आई हैं ये ||
आँखों के पानी से सीचा है
खुद को  ||
तभी तो वक़्त को जीत पायी हैं
ये ||

नादान है ये प्यार ,
बूंदों की तरह , ज़मी को छूना चाहता है ||
कुछ सहारा मिल जाए , दो टुकड़ा ही सही
अपने पैरो पे खड़ा होना चाहता है ||

भूल  जाता है , की
बेबस लताओं की, कोई ऊचाई नहीं होती |
जो पनपते हैं , दिल के गहरायियो में
उनकी कोई परछाई नहीं होती ||

मानता नहीं है
उम्मीदों के पंख लगा के
उड़ जाना चाहता है |
इसे तलाश है अपने गगन की
हर रिश्ता तोड़ कर
उसी रस्ते पे
मुड जाना चाहता है ||

आज़ाद

नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी  इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख  तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...