Monday, May 24, 2010

पैसा पैसा

कभी बना था पैसा लोगो के लिए
आज पैसे  के लिए लोग बनते हैं
सुबह शाम भाग रही है दुनिया
हर चेहरा पैसे के ले बदलते हैं
..........
कितना अजीब हैं पैसा
हर पल बसेरा बदल लेता हैं
प्यार इतना फिर भी है, पैसे से
हर कोई खुद को, बदल देता हैं
.....
जानते नहीं हैं ज़िन्दगी की कीमत
हर कीमत वस, पैसा ही बनाती हैं
अपने पराये, अब खून से नहीं
पैसे के वजन से आकी जाती हैं
....
इस अंधेर ज़माने में
पैसा ही चमकता सितारा है
मंजिले मिलेंगी उन्हें , जिन्हें हासिल हैं पैसा
वाकिओ के लिए , भगवान् ही सहारा हैं
..
Picture taken from www.flickr.com

Saturday, May 22, 2010

मै तो मैं हूँ

 मैं कौन हूँ
कोई बता दे मुझे
क्या करे की मिले खुशी
कोई समझा दे मुझे  |
देखा  जिस किसी को
सब सवाल ही लगे
परमात्मा , आत्मा
सब ख्याल ही लगे ||
आँखे मूंद चलू
या , खुद के रस्ते बनाऊ
या, फिर दुसरो के लिए
खुद ही, एक रास्ता बन जाऊ |
ज़न्दगी कितनी सकरी सी है
दो हाथ कुछ खास खुले  नहीं
आस पास की दीवारों ने , ज़कड़ दिया
पंख खोल , कभी आसमानों में उड़े नहीं ||
ज़ब खोले नहीं सब राज़ पहेलियो के
तो सब प्रशनो की गुथी कहा से लाऊ
कुंजी तो बाट, मैं भी सकता हूँ
पर खुल जाए, वो ताले कैसे बनाऊ |
बहूत पढ़ा हैं पन्नो में , किस्से ज़िन्दगी के
उन्हें काट के अपनी कस्ती कैसे बनाऊ
बहूत करीब हु मैं अपनी कहानी से
मैं तो मैं ही हु ,
भला मैं, उन पन्नो सा कैसे बन जाऊ ||
(Picture used from http://www.rogermurrell.com)

Friday, May 21, 2010

बिछोह


अहू अहू करे , दिलवा हमार
कहे नहीं कुछ भी , कभी
कभू करे बतिया हज़ार
अहू अहू करे
दिलवा हमार
...
टुक टुक देखे , कभी
खोले किबाड़ 
कैसन कैसन बतिया , आये मन में
डर लगे है , सरकार
कैसे खोले हम किबाड़
अहू अहू करे ...दिलवा हमार
....
जला हाउ दिलवा ऐसे
चूल्हा में कोयला जैसे
हो ना जाये राख , दिलवा हमार
.....
किते दिन बीते है रोज
बीते नहीं विरहा  के शोर
खट्टे से  लगे है पल
डंक कटे  हैं जोर, बिछुवा हज़ार
अहू अहू सा करे हैं , दिलवा हमार
....

Sunday, May 16, 2010

रक्त

कुछ लाल सा हैं
कब से, उबल रहा
मचल रहा ......
तोड़ने को हर हदे
दिल की हर सरहदे
चल रहा
कुछ लाल सा हैं ...उबल रहा
....
कोई साथ दे अगर
एक हाथ दे अगर
कोई तो दिशा दिखा
कोई रास्ता बता
कुछ लाल सा ....उबल रहा ...
....
ठाहरा नहीं , कही
जब से मिली  ज़मी
बहता ही रहा
कितने दिए सितम
लेकिन हर जनम
सहता ही रहा
कुछ लाल सा  है.....उबल रहा
..
कोई आग तो जलाये
कुछ लकडिया तो लाये
चुपचाप कब से बैठा
कही ठंडा हो ना जाए
कुछ लाल सा है ये ...कब से उबल रहा
......
पंदंदिया बना के
नलयो में बांध डाला
कुछ कर ना जाए ये
कबसे मचल रहा
कुछ लाल सा है ...कब से मचल रहा
....

Thursday, May 13, 2010

Meri Bujji (My Son)

आये तुम , आये तुम
आये तुम , ज़िदगी खिल गयी
साथ थे हम , अकेले अकेले
अब  जीने की वजह मिल गयी
....
आँखे अच्छी लगती हैं
बाते अच्छी लगती हैं
जो कुछ भी बोलते हो
अमृत सा घोलते हो
तुम आये तो , हर खुशी मिल गयी
तुम आये तो....
......
छोटी सी आँखे प्यारी
तुम हो अब जान हमारी
अक्सर जो हस्ते रहते हो
कितने प्यारे लगते हो
...............

Thursday, May 06, 2010

Kuch Naya ( Life)

कुछ अलग लिखना चाहता हु
ज़िन्दगी , रस्ते ,प्यार से अलग
कुछ और आगे बदना चाहता हूँ
...
साथ दे अगर शब्दों के पर
पंख लगा के और उचा उड़ना चाहता हु
मन के बंधन तोड़ कर
कुछ और कहानियों से जुड़ना चाहता हु
...
लिखना चाहता हु कुछ अलग
ऐसी कहनिया जिसे  कोई कवि  ना बना  पाया हो
कुछ ऐसे किस्से , एकदम नए से
जो आज तक  पन्नो पे , कोई  गड ना पाया हो
....
तोडना होगा , कुछ जंजीरे उंगलियों के
दिल के गहरयियो के खंगालना होगा
बन के बैठे  हैं जो चेहरा , चेहरे के ऊपर
कुछ पुराने नक़ाबो को उतारना होगा
...
अनकहे कुछ खवाब बेताब हैं नज़रे मिलाने को
उन्हें कुछ  कलमो का सहारा चहिये
उभर आयेंगे ज़मी से हर किनारा तोड़ कर
बस एक फिरदौस  कवि का , इशारा चाहिए

Friday, April 30, 2010

Break le...Life)











Cut rahi hain zindagi
कट रही हैं ज़िन्दगी
Kuch bhi ho na pata
कुछ भी हो ना पता
Thak gaye hain kadam
थक गए हैं कदम
soch le.....
सोच ले
break le break le break le......
ब्रेक ले ब्रेक ले ब्रेक ले
......
dil me agar jo jagah na mile
दिल में अगर जो जगह ना मिले
dusre ke liye , koi ghar na mile
दुसरे के लिए कोई घर ना मिले
sochta hai agar tu. sirf ek ko....soch leeeeeee
सोचता हैं अगर तू सिर्फ एक को......सोच ले
break le break le break le...
ब्रेक ले ब्रेक ले ब्रेक ले
..............
Kat'ti hain har subah
कटती हैं हर सुबह
Raat kat jaati hain
रात कट जाती हैं
khus karne me hi
खुश  करने में ही
baate thank jaati hain
बातें थक जाती हैं
Thoda khihila ke has...sach bol de
थोडा खिलखिला  के हस , सच बोल दे
break le break le break ले
ब्रेक ले ब्रेक ले ब्रेक ले
................
Ho gaya hain bore zo , tu apne naam se
हो गया हैं बोर जो , तू अपने नाम से
Har gadi lag raha , tu gaya kaam se
हर घड़ी लग रहा , तू  गया काम से
zara battiya bujha...kuch andhra zala
ज़ारा बातिया बुझा , कुछ अँधेरा ज़ला
kaali rootiya, zara sek le...
काली रोटिया  ज़ारा सेक ले
break le break le break le....
ब्रेक ले ब्रेक ले ब्रेक ले

आज़ाद

नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी  इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख  तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...