दे दो अपने हाथो को मेरे हाथो में
साथ चलेंगे हौले से चान्दिनी रातो में
कसम से बहुत सम्हाला था दिल को
पर प्यार सा होने लगा है बातो बातो में
.....
सुनहरी शाम हैं और हलकी हवाए हैं
घने जुल्फों को तेरी आँखों पे ले आये हैं
हटा लो उन जुल्फों को आपने आँखों से
घने बदलो के पीछे , चाँद अभी भी शर्माए हैं
...............
तेरे होटो को छु कर , ये हवा जो मेरे पास आई हैं
शर्म से लाल , अभी भी थोड़ी शरमाई हैं
लगता हैं तुम्हारे सुर्ख होटो की शबनम
इसी गुस्ताख ने चुरायी हैं
......
आओ बैठो मेरे पास ,
अपनी साँसों को मेरे नजरो से छु लेने तो दे
बेताब हैं ये आँखे , तुम्हे देख कर
तेरे आँखों के इन्हें रूबरू होने तो दो
.............
शब्दों की गहराई अचूक है !! जब साथ हो जाती है तो नयी दुनिया बना लेती है !! मैं इन्ही शब्दों का शब्दकार हु , शब्दों से खेलना मेरी आदत , शब्दों में जीना मेरी हसरत !! जुडये मेरे साथ , कुछ सुनिए कुछ सुनाइए , एक दुसरे का हौसला बढाइये||
Wednesday, April 28, 2010
Sunday, April 25, 2010
Ek safar ki kahani (Life)
गुजर जाती हैं ज़िन्दगी
और हम, राहे दूंदते रह जाते हैं
मंजिले मालूम नहीं पर
हर मोड़ पर पता पूंछते रह जातें हैं
...
कभी सीधी तो कभी उलटी
जो भी राह मिली , चलते रहते हैं
जो मिला वही हमसफ़र
अगली राह पे , नए लोग मिलते रहते हैं
...
छुपा लिया कभी गम के निशा
तो कभी खुशियों के नकाब ओढ़ कर
चेहरे को बदलना अच्छा लगता हैं
सच वही हैं, जो छिपा राहे
आज कल हर झूट ही, सच्चा लगता हैं
.....
मालूम हैं, कोई नहीं तो ये हवाए तो साथ देगी
काफिले गुजर जायेंगे यु ही,
मिटने को उसके निशा , हवाए ही साथ होगी
बड़ी बेदर्द इन हवाओ की कहानी हैं
साथ हो कर भी साथ होती नहीं
थम जाती हैं , फिर भी इनकी रात होती नहीं
आँखे खोल कर हर चेहरा पढती हैं
खुद क्या है , कोई राज खोलती नहीं
मंजिले इनकी भी नहीं होती
कभी इस दिशा तो कभी , उस दिशा
कभी कभी सोचता हु
कौन सी बाला हैं, क्यों थकती नहीं
रूकती नहीं , किसी का राह तकती नहीं
साथ रहती हैं , फिर भी साथ रहती नहीं
.......
फिर सोचता हु
ये साथ के अर्थ क्या हैं
साथ रहने के, सुना हैं बहुत अफ़साने हैं
साथ चलने के , शर्त क्या हैं
कोई कहता हैं , प्यार में शर्त नहीं होती
कभी कभी प्यार की राहे अजब होती हैं
हर शायर कहते हैं, प्यार की कोई तर्क नहीं होती
फिट भी सब प्यार को अपनाना चाहते हैं
मर के भी , प्यार को पाना चाहते हैं
क्या बला हैं ये प्यार ,
हर मोड़ पे बदल जाते हैं
जो मिला हमसफ़र मुस्कुरा कर
हम उसी से प्यार कर जाते हैं
.........
प्यार करना भी तो इतना असा नहीं
हर किसी को जयादा कुछ आता नहीं
सुना हैं आजकल प्यार के अलग मायने होते हैं
प्यार को हर कोई आजकल पाता नहीं
......
पाते तो हम कभी हवाओ को भी नहीं
प्यार की तरह हर राह में साथ रहती हैं
खुद कुछ भी साफ़ कहती नहीं
चहरे के पास, कानो में
बस बुदबुदाती रहती हैं
.........
साफ़ कहना , लोगो की फितरत नहीं
साफ़ सुनना लोगो की आदत नहीं
मस्फुक हैं इतने , बस मज़िलो को धुंडने में
किसी को उनकी राहे पूछने को इजाजत नहीं
.........
सुना हैं , इसलिए लोग राहे दुंदते रह जाते हैं
हवाओं को बंद कर नहीं पाते मुठियो में
प्यार को शर्तो में बंधते रह जाते हैं
मुसाफिर ही नाम होता हैं उनका
काफिलो में गूम ,
बस निशा कदमो के ,
छोर जाते हैं
फिर ये पागल हवाए , आती हैं न जाने कहा से
मिटा देती है हर कदम
शुरू हो फिर एक नया सफ़र ,
फिर बने एक कहानी , वहा से
..... to be continued ...
और हम, राहे दूंदते रह जाते हैं
मंजिले मालूम नहीं पर
हर मोड़ पर पता पूंछते रह जातें हैं
...
कभी सीधी तो कभी उलटी
जो भी राह मिली , चलते रहते हैं
जो मिला वही हमसफ़र
अगली राह पे , नए लोग मिलते रहते हैं
...
छुपा लिया कभी गम के निशा
तो कभी खुशियों के नकाब ओढ़ कर
चेहरे को बदलना अच्छा लगता हैं
सच वही हैं, जो छिपा राहे
आज कल हर झूट ही, सच्चा लगता हैं
.....
मालूम हैं, कोई नहीं तो ये हवाए तो साथ देगी
काफिले गुजर जायेंगे यु ही,
मिटने को उसके निशा , हवाए ही साथ होगी
बड़ी बेदर्द इन हवाओ की कहानी हैं
साथ हो कर भी साथ होती नहीं
थम जाती हैं , फिर भी इनकी रात होती नहीं
आँखे खोल कर हर चेहरा पढती हैं
खुद क्या है , कोई राज खोलती नहीं
मंजिले इनकी भी नहीं होती
कभी इस दिशा तो कभी , उस दिशा
कभी कभी सोचता हु
कौन सी बाला हैं, क्यों थकती नहीं
रूकती नहीं , किसी का राह तकती नहीं
साथ रहती हैं , फिर भी साथ रहती नहीं
.......
फिर सोचता हु
ये साथ के अर्थ क्या हैं
साथ रहने के, सुना हैं बहुत अफ़साने हैं
साथ चलने के , शर्त क्या हैं
कोई कहता हैं , प्यार में शर्त नहीं होती
कभी कभी प्यार की राहे अजब होती हैं
हर शायर कहते हैं, प्यार की कोई तर्क नहीं होती
फिट भी सब प्यार को अपनाना चाहते हैं
मर के भी , प्यार को पाना चाहते हैं
क्या बला हैं ये प्यार ,
हर मोड़ पे बदल जाते हैं
जो मिला हमसफ़र मुस्कुरा कर
हम उसी से प्यार कर जाते हैं
.........
प्यार करना भी तो इतना असा नहीं
हर किसी को जयादा कुछ आता नहीं
सुना हैं आजकल प्यार के अलग मायने होते हैं
प्यार को हर कोई आजकल पाता नहीं
......
पाते तो हम कभी हवाओ को भी नहीं
प्यार की तरह हर राह में साथ रहती हैं
खुद कुछ भी साफ़ कहती नहीं
चहरे के पास, कानो में
बस बुदबुदाती रहती हैं
.........
साफ़ कहना , लोगो की फितरत नहीं
साफ़ सुनना लोगो की आदत नहीं
मस्फुक हैं इतने , बस मज़िलो को धुंडने में
किसी को उनकी राहे पूछने को इजाजत नहीं
.........
सुना हैं , इसलिए लोग राहे दुंदते रह जाते हैं
हवाओं को बंद कर नहीं पाते मुठियो में
प्यार को शर्तो में बंधते रह जाते हैं
मुसाफिर ही नाम होता हैं उनका
काफिलो में गूम ,
बस निशा कदमो के ,
छोर जाते हैं
फिर ये पागल हवाए , आती हैं न जाने कहा से
मिटा देती है हर कदम
शुरू हो फिर एक नया सफ़र ,
फिर बने एक कहानी , वहा से
..... to be continued ...
Friday, April 23, 2010
तुम कौन हो (लव)
Tum kaun ho
Meri,
suni zindagi me
Angel ban ke aayi ho
Badi bewajah meri,
raahe lag rahi thi
pyar bhare sapne le kar
aisa angle layi ho.....angel ban ke aayi ho
aaisa kya kiya maine
Pichli zinadagi me
Is zindagi me mujhko
Tum se mila diya...badi bewajah.....1
kabhi jo gira main, tera haath paya hain
Khusi me , gum me mere
Tera hi to saaya hain ,
Ye , rab ne bataya hain .....tum kon ho......1
Zaha bhi mai dekhta hu
Mere saath ho
Ho subah, ya ho saam
Mere pass ho
tum, rainbow ban ke chayi ho....angel ban ke aayi ho...
Meri,
suni zindagi me
Angel ban ke aayi ho
Badi bewajah meri,
raahe lag rahi thi
pyar bhare sapne le kar
aisa angle layi ho.....angel ban ke aayi ho
aaisa kya kiya maine
Pichli zinadagi me
Is zindagi me mujhko
Tum se mila diya...badi bewajah.....1
kabhi jo gira main, tera haath paya hain
Khusi me , gum me mere
Tera hi to saaya hain ,
Ye , rab ne bataya hain .....tum kon ho......1
Zaha bhi mai dekhta hu
Mere saath ho
Ho subah, ya ho saam
Mere pass ho
tum, rainbow ban ke chayi ho....angel ban ke aayi ho...
Saturday, April 17, 2010
Being alone....
its not the first time i am alone ... I have been a musfir all along my life ,hopping school to school , city to city , state to state , frds to frds... & now countries, change is something , that remained with me & myself very comfortable growing along from boy to man. being a man is not every time so easy , so many eyes looking for u , endless waits and tears shouting all across that hey there is something u have left behind this time,..and i say yes , i did leave.
to , my dear dazy & Tejas, though u r thr far "saat samundar" , there is enough magnet in my heart that keeps me attached from u both. There is always an ultimate destination to every musfir , and i have identified mine too... so though i am far away ...but remember " ye raah meri manzil nahi " & i will back soon to walk along with u , together we shall reach "hamari manzil"
to , my dear dazy & Tejas, though u r thr far "saat samundar" , there is enough magnet in my heart that keeps me attached from u both. There is always an ultimate destination to every musfir , and i have identified mine too... so though i am far away ...but remember " ye raah meri manzil nahi " & i will back soon to walk along with u , together we shall reach "hamari manzil"
Monday, February 15, 2010
तुम..
ये शहर सूना सूना सा था
और मैं कही रह रहा कोने में था
अंजान था ये शहर
पथरो सी नज़र,पहने
लोग दिखते थे पर, नज़र आते नहीं थे
आवाज़े तो होती बहुत थी
आवाज़े ही होती बहुत थी
कोई सुर न ताल, न कोई शब्द
बाते तो होती बहुत थी
पर बाते ही होती बहुत थी
क्या मैं ही शहर था वैसा
ये मेरे अन्दर ही, वो शहर था
जल रहा कभी एक बूंद पानी के बिना
क्या मैं ही वो बेदर्द, दोपहर था
एक दिन तुम मिली
और शयद मैं भी खुद से मिला
अजीब लगता था की अचानक
आपने परछाइयो से हाथ मिला रहे थे
पता नहीं तुमपे, या खुद पे
मुस्कुरा रहे थे
हाथ थमा था जिस दिन तुमने
लगता था, इस शहर को सहारे मिल गए हो
यु तो मेरे हाथ पास ही थे मेरे
पर शायद लगा को, मेरे हाथ दुबारा मिल गए हो
अच्छा लगता था करना बाते तुमसे
बाते जो तुमसे होती रहती थी
सिर्फ बाते कहा थी वो
बातो बातो में अक्सर
मेरे दिल से मेरी, मुलाकाते भी होती रहती थी
अक्सर तेरे नजरो में मुझको
अपना सारा शहर दीखता था
अजीब था शहर,पता नहीं कैसे
सुनहरी शाम जैसा, वो दोपहर दीखता था
अब सूना नहीं लगता मुझे कभी भी
हर कोना अपना अपना सा लगता है
तेरी नजरो में अक्सर, देख लेता हु अक्सर
वो पुराना शहर, सपना सा लगता हैं.....
और मैं कही रह रहा कोने में था
अंजान था ये शहर
पथरो सी नज़र,पहने
लोग दिखते थे पर, नज़र आते नहीं थे
आवाज़े तो होती बहुत थी
आवाज़े ही होती बहुत थी
कोई सुर न ताल, न कोई शब्द
बाते तो होती बहुत थी
पर बाते ही होती बहुत थी
क्या मैं ही शहर था वैसा
ये मेरे अन्दर ही, वो शहर था
जल रहा कभी एक बूंद पानी के बिना
क्या मैं ही वो बेदर्द, दोपहर था
एक दिन तुम मिली
और शयद मैं भी खुद से मिला
अजीब लगता था की अचानक
आपने परछाइयो से हाथ मिला रहे थे
पता नहीं तुमपे, या खुद पे
मुस्कुरा रहे थे
हाथ थमा था जिस दिन तुमने
लगता था, इस शहर को सहारे मिल गए हो
यु तो मेरे हाथ पास ही थे मेरे
पर शायद लगा को, मेरे हाथ दुबारा मिल गए हो
अच्छा लगता था करना बाते तुमसे
बाते जो तुमसे होती रहती थी
सिर्फ बाते कहा थी वो
बातो बातो में अक्सर
मेरे दिल से मेरी, मुलाकाते भी होती रहती थी
अक्सर तेरे नजरो में मुझको
अपना सारा शहर दीखता था
अजीब था शहर,पता नहीं कैसे
सुनहरी शाम जैसा, वो दोपहर दीखता था
अब सूना नहीं लगता मुझे कभी भी
हर कोना अपना अपना सा लगता है
तेरी नजरो में अक्सर, देख लेता हु अक्सर
वो पुराना शहर, सपना सा लगता हैं.....
Friday, September 04, 2009
Choti si luv story...

छोटा से बचपन में
अक्सर खो सा जाया करता हु..
कभी तालावों पे, तो कभी पग्दंदियो पे..
तो कभी बरगद के शाखाओ पे..
सो सा जाया करता हु...
............
कभी दादी के किस्से
कुछ कहानियों के हिस्से
सुबह सबेरो के सैर सपाटे
कभी मम्मी के दो चार झापते
उन्ही आवाजो को दिल से, लगाये रहता हु
इतना बेचारा निर्दोष सा बचपन हैं मेरा
इसलिए उसे आज कल के निगाहों से, बचाए रखता हु
....................
इन्ही से प्यार करता हु
इन्ही को याद करता हु
यही हैं मेरी, छोटी सी लव स्टोरी
इसी को छुपा के, रखता हु
Wednesday, July 08, 2009
इन dino

मंजिलो में चलते चलते
कुछ राह बदल जातें हैं
शुरुआत कहाँ होती है
ये ख्तम कहीं होते है
....
अक्सर राहो में चलते चलते
हमराह बदल जातें है
एक मोड़ में जो मिलते है
एक मोड़ में खो जातें हैं
...
पल दो पल में, अक्सर
तकदीर बदल जाती हैं
दिल में कोई रहता है
पर तस्वीर बदल जाती है
....
हर वक्त बदलते किस्सों में
किरदार बदल जाते हैं
ज़मीं वही होती है
पहरेदार बदल जाते हैं
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आज़ाद
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