Thursday, November 24, 2011

बहने दो

जालों में, जो बंद है ,
ज़िन्दगी सी
खोलो , बहने दो उसे
एक नदी सी | 
उड़ने दो ......., रोको न कही ,
आने दो
एक खुशी सी ||
अला , ला ला ला ला , लाला .....

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न बनी है ये
छिपने के लिए
सुनो , न बनी है ये
चुप रहने के लिए |
आने दो................ , दिल की आवाजे
कहने दो ..........., कहना चाहता है कुछ बातें
खोल दो , दिल को अब 
दिल बना है ,  रहने के लिए ||
अला , ला ला ला ला , लाला .....

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कही , न देर हो जाए
ये जो शमा है , बुझने  ना पाए 
उठो ................ जागो
अपने हाथो में, है चाँद सूरज
कुछ कर दिखाओ , सुबह बनाओ
अला , ला ला ला ला  , लाला .....

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Thursday, September 15, 2011

शुक्रिया हिंदी ||

नहीं कह पाता गैरो की जुबा में

अपनी कहानी |

मेरे आँखों को अच्छी लगती है

सिर्फ अपनी भाषा में लिखी

अपनी जुबानी ||
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प्यार के संवाद तो, दिल से निकलते हैं

उनका अंगेरजी अनुवाद कैसे बनाऊ

मेरा दिल तो हिंदी है

उसपर अंगेरजी की परत कैसे लगाऊ ||
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दिल की परतो को

जब भी शब्दकार की छुरी से कटा

वो निकली आह , हिंदी ही थी |

लगाया था मरहम जिसने

खुद को खर्च करके

वो हमदर्द, वो दिन भी

हिंदी ही थी ||
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न जाने कितनो ने दफनाना चाहा

समय की मिटटी में तुम्हे , मुर्दा कह के |

तुम फिर भी रही जिंदा

दिलो में हमारे , हमारी जुवा बन के ||
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आज हिंदी दिवस पे

हर कबि का, तुम्हारे लिए पैगाम है |

तुम्हारे संघर्ष को

हम सभी का , सलाम है ||
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Thursday, September 08, 2011

बेबस नहीं रहना है ||

क्या आँशु बहाने के सिवा
कुछ और करना, नहीं है
सिर्फ धमाको से ही
मरना सही है ||

जब तक डरते रहोगे, डर से
ये खोखले टोपीवाज 
डराते रहेंगे |
आतंक के खिलाफ जंग जारी है
कह कह  के
हर लाश पे वो, मुस्कुराते रहेंगे ||

मन में दबाये बैठे हम
इस गुस्से से क्या कर पाएंगे |
फटेगा तो अन्दर ही फटेगा
उस नहीं तो, इस धमाके से
बेमौत मारे ही जायेंगे ||


डरते नहीं हैं ये टोपीवाज़, आतंक से
अपना कोई आज तक, मरा ही नहीं
कभी उठाई नहीं लाशे, अपने बच्चो की
इसलिए शायद , आँखों का तालाब
कभी भरा ही नहीं ||

कोई नहीं जलाएगा मशाल अपने लिए
हमारे मन का अँधेरा है
खुद ही जलाना होगा |
छोड़ दे विश्वास  , इन टोपिवाजो से 
शायद ,
अब आतंक से लड़ने
हमे , खुद ही को आगे आना होगा ||


जय हिंद !!

Wednesday, August 17, 2011

आजाद हो ||

हाथ में नहीं तो
दिल में मशाल जलाये रखना है
देख नहीं सकते, गद्दारों को लुटते अपने वतन को
हर आँख को अब हमे, जगाये रखना है
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जब तक आवाज है सीने में
आजाद हो

जब तक डर नहीं है जीने में
आजाद हो ...

देख कर बेगुनाहों पे सितम
कुछ होता है अगर
तो आजाद हो ...

है अगर गद्दारों से
लोहा लेने का जिगर
तो आजाद हो ...

कर लो खुद से वादा
आजाद ही रहना है , जिंदा हूँ जब तक
बेड़िया न डाले कोई , जिन्दा हूँ अब तक
करते रहोगे जब तक ज़द्दो ज़हद
तो आजाद हो ,
.............................

Wednesday, June 29, 2011

तेरी आँखों में - मेरी आवाज में

मैंने अपनी एक शायरी को अपनी आवाज़ देने की कोशिश की है | अभी भी सुधार की जरुरत है , पर एक पहला प्रयास  है |
http://www.youtube.com/watch?v=mygGATlbyaI



Wednesday, June 01, 2011

अपना ले ज़िन्दगी ...

(मेरा नया गाना ज़िन्दगी से कुछ मांगते हुए किरदार के बारे में है !! मैं ज़ल्द ही इसे you Tube  पर अपने आवाज में upload  करूँगा )

मैं   जीना  चाहता  हूँ   , अपना  ले  ज़िन्दगी
कुछ  उड़ना  चाहता  हूँ   , पंख  लगा  दे  ज़िन्दगी
बीते  हैं  पल  जो  प्यार  के  , उसे  ला  दे  ज़िन्दगी
बतला  दे....  ज़िन्दगी  …..हे  ये  हे  ये  हे हे  , हे  हे  हे हे

कुछ  कशमकश  सी  है  , सुलझा  दे  ज़िन्दगी
गहरे  अंधेरो  में   , कुछ  जला  दे  ज़िन्दगी
हूँ  रौशनी  से  रूबरू  , मिला  दे  ज़िन्दगी
बतला  दे....  ज़िन्दगी  , .... हे ये हे ये हे हे , हे हे हे हे

….
कुछ  गाना  चाहता  हूँ  , गुनगुना  ले  ज़िन्दगी
बिखरे  है  सुर  जो  सारे  , साथ  ला  दे  ज़िन्दगी
अहसान  तेरा  बहुत  होगा , दिल  लगा  दे  ज़िन्दगी
बतला  दे.......  ज़िन्दगी  , .... हे ये हे ये हे हे , हे हे हे हे


कुछ  कसूर  मुझपे  हैं  , ना  सज़ा  दे  ज़िन्दगी
पा  लूँ   मंजिले  मै   , कुछ  दिखा  दे  ज़िन्दगी
भटका  हूँ   मै  बहुत  , अब  बसा  दे  ज़िन्दगी
मुझे बचा   ले .... ज़िन्दगी . ..... हे ये हे ये हे हे , हे हे हे हे
हु उ हु हु हु ... हु उ हु हु .... ला ला ... ला ला ला ....ला ला ....ला ला ||

Sunday, May 22, 2011

गैर

उन्हें  जन्नत   दी  है  तोफे  में

हमे  तो  दोजख   में  भी  ठिकाना  ना   मिला

हर  दुआ  और  दवा  उनको  मिली

हमे  तो  दर्द  बताने  का  भी , बहाना ना   मिला ||



की  परदे  में  हम  हैं

या  उन्होंने  चेहरा  छुपा  लिया 

नज़रो  से  मिलती  नज़र  नहीं  आज  कल , तो  

हमे  भुलाने  का  बहाना  बना  लिया  ||



बिछी  हर बिसात उनके  लिए

हमे  तो  जंगे   जहद  से  ही  निकाल  डाला

हर  फतह  में  नामो  –शोहरत   मिली  उनको

हमरे  खून  को  तो उन्होंने , पानी  बना  डाला  ||



इस  अंधेर  नगरी  में  

अंधो  का  बोलबाला  है

शोर  माचाने  बाले  जिंदा  रहते  है  यहाँ

आँख  वालो  का  मुह  काला  है  ||

आज़ाद

नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी  इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख  तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...