Thursday, October 09, 2025

मर्ज

चलो, हमदर्द नहीं तो
मेरा दर्द ही बन जाना तुम ,
महसूस करूं धड़कनों में हर वक्त
इस तरह,
मेरा मर्ज ही बन जाना तुम ।।

अलविदा

सुना था,
मंजिलें नहीं होती
खुशियों की , बस रास्ते होते है ।
बदल न जाएं मौसम फिर से
हमने एक मोड पे
उन्हें , अलविदा कह दिया ।।

ज़ख्म

कौन भूलता है , भुलाने के लिए ।
गुजर जाए कुछ वक्त तो सुकून आए
ज़रूरी है भूल जाना भी
ज़ख्मों में धूल चढ़ाने के लिए ।।

काटा

कौन कहता है कि लफ्जों से
दर्द कम होते हैं
चुभ जाए जो काटा सीने में
तो हमदर्द सिर्फ, गम होते हैं ।।

दर्द

सब दरवाजे बंद हैं दिलों के
तो आवाजें कौन सुने,
और कौन सुने फरियादें ...
अपने ही मन में दब के
रह गई हैं बातें दिल की
और आंखों में
लंबी बरसाते।।

सवाल

कुआं, तू बुझा देता है सबकी प्यास
फिर तेरी प्यास कौन बुझाता है?
सबको घर ले जाने वाले, ओ रास्ते
तुझे मंजिल कौन पहुंचता है ?
जला कर खुद को, रौशन करने वाले
ए आग , तुझे अंधेरे से कौन बचाता है ?
सब को देने वाले , परबरदिगार
क्या तुम्हे भी कोई खुशियां दे जाता है?

इश्क

जो रोए न इश्क़ में तो, इश्क़ कैसा
जब तक जान पे न बन आए, तो रिस्क कैसा ।
कफ़न बांध के निकले हैं, तुम्हे पाने के लिए
अब ये सांसें ही बची है , गंवाने के लिए ।।
~राहुल

आज़ाद

नहीं नापता मैं खुद को तेरे पैमाने से .. मेरी तासीर मेल न खायेगी  इस ज़माने से ।। अपनी जेब में रख  तेरे कायदे कानून .. मैं नहीं टूटने वाला ते...